छत्तीसगढ़ HC ने PDS घोटाले की CBI जांच वाली याचिकाएं की खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कथित ₹5,000 करोड़ के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या एक विशेष जांच दल (SIT) को सौंपने की मांग वाली याचिकाओं के एक बैच को खारिज कर दिया है.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की खंडपीठ ने एक साझा आदेश सुनाते हुए यह निर्णय दिया. न्यायालय ने अपने अवलोकन में कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा 2015 में दर्ज प्राथमिकी (FIR) से उत्पन्न आपराधिक मुकदमा पहले ही उन्नत चरण पर पहुँच चुका है, जिसमें 224 अभियोजन गवाहों में से 170 से अधिक के बयान दर्ज किए जा चुके हैं.
न्यायालय ने टिप्पणी की कि चूंकि यह मुकदमा विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के समक्ष चल रहा है, इसलिए "इस स्तर पर जांच को CBI को स्थानांतरित करने का कोई उचित आधार नहीं है." पीठ ने यह भी उम्मीद जताई कि ट्रायल कोर्ट "शीघ्रता से मुकदमे को समाप्त" करेगा.
याचिकाओं, जिनमें कई जनहित याचिकाएं (PILs) और एक अपील शामिल थी, में राज्य की PDS के तहत खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण और वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था और CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), या कोर्ट-निगरानी वाली SIT जैसी केंद्रीय एजेंसियों से एक स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी.
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 16 सितंबर, 2025 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित PDS घोटाले के प्रमुख आरोपी वरिष्ठ IAS अधिकारियों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत रद्द कर दी गई थी और दोनों को जांच पूरी करने और शिकायत दर्ज करने की सुविधा के लिए चार सप्ताह की अवधि के लिए ED के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया गया था.
सभी लंबित मामलों को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि मुकदमे में हुई प्रगति और शीर्ष अदालत के निर्देशों के मद्देनजर ये याचिकाएं "अप्रभावी" हो गई हैं. कुछ याचिकाकर्ता, जिनमें वकील सुदीप श्रीवास्तव भी शामिल थे, अपनी जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए अपना कानूनी आधार साबित करने में भी विफल रहे.