छत्तीसगढ़: 77 लाख रुपये के LPG गबन मामले में पिता-पुत्र गिरफ्तार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ पुलिस ने एलपीजी गैस के एक बड़े गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार नामजद किया है. इसके साथ ही पुलिस ने कई राज्यों में महीनों तक चले व्यापक तलाशी अभियान के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उनके बेटे व कंपनी निदेशक सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर लिया है.
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक पूर्व खाद्य विभाग के अधिकारियों और बिचौलियों सहित कुल छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, और पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
इस पूरे मामले की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी, जब सिंघोड़ा पुलिस ने एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था. आगामी गर्मी के महीनों में पुलिस थाने में इतनी बड़ी मात्रा में ज्वलनशील एलपीजी गैस रखना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक था. इसी सुरक्षा जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन और अधिकारियों ने इन वाहनों को एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया.
इसके बाद कोर्ट के आदेश पर 30 मार्च 2026 को इन सभी छह एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित अभिरक्षा (कस्टडी) के लिए रायपुर के उरला स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के परिसर में भेज दिया गया.
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इस गबन की साजिश ट्रकों को सौंपे जाने से पहले ही, यानी 19 मार्च 2026 को ही शुरू हो गई थी. आरोप है कि सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर एक ऐसी योजना तैयार की, जिससे बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के एलपीजी गैस को गायब किया जा सके.
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस सौदे को तय करने में पंकज चंद्राकर ने मुख्य बिचौलिए की भूमिका निभाई, जबकि मनीष चौधरी ने विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत का समन्वय किया. शुरुआत में इस काम के लिए 1.3 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जो एक सप्ताह की बातचीत के बाद 90 लाख रुपये पर तय हुई.
आरोप है कि जैसे ही ट्रक ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के परिसर में पहुंचे, उनका आधिकारिक वजन होने से पहले ही सारी एलपीजी गैस चुपके से निकाल ली गई. इस चोरी को छिपाने के लिए 6 से 8 अप्रैल के बीच खाली हो चुके ट्रकों का वजन कराया गया और फर्जी वजन रिकॉर्ड व जाली पंचनामा तैयार किया गया.
इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया को कानूनी रूप देने के लिए साजिश में शामिल लोगों को ही गवाह बनाया गया, जिन्होंने खाद्य विभाग के कार्यालय में बैठकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए.
जांच में पता चला कि आरोपियों ने क्षेत्र में एलपीजी की भारी किल्लत और बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाया. चुराई गई गैस को बिना किसी जीएसटी अनुपालन और अनौपचारिक इनवॉइस के जरिए करीब 20 विभिन्न एजेंसियों और संस्थानों को बेच दिया गया. पुलिस को सबसे बड़ा सबूत कंपनी के अप्रैल महीने के लेनदेन से मिला.
ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने इस दौरान वैध रूप से केवल 40 टन एलपीजी खरीदी थी, लेकिन उसने बाजार में लगभग 135 टन गैस बेची. पुलिस का मानना है कि यह अतिरिक्त 95 टन गैस वही थी जो उन्हें रखवाली के लिए सौंपी गई थी. इस तरह पांच ट्रकों से जुड़े हितधारकों की करीब 77 लाख रुपये की एलपीजी का गबन किया गया.
मामला दर्ज होने के बाद संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर लगातार अपने ठिकाने, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बदलकर पुलिस को छका रहे थे. पुलिस ने उनकी तलाश के लिए 11 शहरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, सोशल मीडिया और टोल प्लाजा डेटा को खंगाला.
आखिरकार, छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष टीम ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से दोनों को कोल्हापुर के एक होटल से धर दबोचा और ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ ले आई. फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की कड़ाई से जांच कर रही है. Symbolic Photo.