छत्तीसगढ़: एथेनॉल के लिये सफेद चुकंदर उगाकर किसान बढ़ाएंगे कमाई
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में कृषि और बायोफ्यूल क्षेत्र में एक बड़ी पहल शुरू हुई है. राज्य सरकार ने गन्ने के साथ सफेद चुकंदर (LS-6 किस्म) की सह-फसली खेती पर देश का पहला संयुक्त अनुसंधान प्रोजेक्ट शुरू किया है. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और एथेनॉल उत्पादन के लिए नए विकल्प तलाशना है.
छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के साथ मिलकर एक साझा शोध परियोजना का आगाज किया है.
इस प्रोजेक्ट के तहत गन्ने के खेतों में खाली पड़ी जमीन का उपयोग कर 'व्हाइट बीट' यानी सफेद चुकंदर की खेती की जाएगी.
विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने की फसल को तैयार होने में लंबा समय लगता है, जिसके शुरुआती चरणों में खेत का काफी हिस्सा खाली रहता है.
सफेद चुकंदर मात्र छह महीने में तैयार होने वाली फसल है, जिसे गन्ने के साथ उगाकर किसान उसी सीजन में अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं.
नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. सीमा परोहा और डॉ. लोकेश बाबर के मार्गदर्शन में चल रहा यह अध्ययन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारेगा, बल्कि बायोफ्यूल क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ की भूमिका को सशक्त करेगा. इस पहल से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा.
गौरतलब है कि एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जिसे मुख्य रूप से शर्करा युक्त फसलों जैसे गन्ना, मक्का और अब सफेद चुकंदर के किण्वन (Fermentation) और आसवन (Distillation) की प्रक्रिया से बनाया जाता है.
एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर 'एथेनॉल ब्लेंडिंग' की जाती है, जिससे न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है बल्कि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण में भी कमी आती है. सफेद चुकंदर जैसे नए स्रोतों का उपयोग एथेनॉल उत्पादन को और अधिक किफायती और सतत बनाता है क्योंकि यह कम पानी और कम समय में बायोफ्यूल के लिए कच्चा माल उपलब्ध करा देता है.