बस्तर में माओवाद का अंत करीब: अब सिर्फ 3 दर्जन लड़ाके सक्रिय
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सुरक्षाबलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च की समय सीमा के करीब आते ही, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिलों में छिपे 'अंतिम' सक्रिय माओवादी नेताओं को बेअसर करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.
खुफिया सूत्रों के अनुसार, अब केवल तीन दर्जन के करीब कट्टर माओवादी बचे हैं, जो मुठभेड़ के डर से तीन-चार के छोटे समूहों में सीमावर्ती इलाकों में सिमट कर रह गए हैं.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन विद्रोहियों की लड़ने की क्षमता खत्म हो चुकी है और वे अब केवल अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
इस अभियान की खास बात यह है कि पुलिस अब केवल हथियारों के दम पर ही नहीं, बल्कि बातचीत और मध्यस्थों के जरिए भी सरेंडर की कोशिशें कर रही है. इसके लिए पूर्व माओवादियों और स्थानीय पत्रकारों की मदद ली जा रही है ताकि बचे हुए कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा सके.
हाल ही में 25 लाख के इनामी माओवादी नेता विकास और उसके 14 साथियों का आत्मसमर्पण इसी रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे नक्सलियों का पूर्वी कॉरिडोर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है.
आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 से अब तक बस्तर में लगभग 280 माओवादी मारे जा चुके हैं और 1550 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया है. अबूझमाड़ जैसे गढ़ों को सुरक्षित करने के बाद अब सुरक्षाबलों का पूरा ध्यान बीजापुर के उन छोटे पॉकेट्स पर है जहाँ अभी भी छिटपुट हलचल बाकी है. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी संकेत दिए हैं कि कई बड़े माओवादी नेताओं के साथ सरेंडर के लिए बातचीत चल रही है.