छत्तीसगढ़: पुराने बिजली मीटरों के 'कबाड़' होने के विवाद का अंत
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने प्रदेश में स्मार्ट मीटर स्थापना के दौरान हटाए गए लाखों पुराने बिजली मीटरों के प्रबंधन से जुड़ी उस महत्वपूर्ण याचिका पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. यह पूरा मामला दिसंबर 2024 में प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट के बाद गरमाया था, जिसमें दावा किया गया था कि प्रदेश भर में करीब 60 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की योजना के बीच हटाए गए पुराने सिंगल-फेज और थ्री-फेज मीटरों को बिना किसी ठोस योजना के जोन कार्यालयों में कबाड़ की तरह फेंका जा रहा है.
रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि यदि इन मीटरों का उचित पुन: उपयोग या नीलामी नहीं की गई, तो सरकारी खजाने को 60 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नियामक आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था.
विद्युत वितरण कंपनी ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि हटाए गए मीटरों के वर्गीकरण के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है. कंपनी के अनुसार, जो सिंगल-फेज मीटर वारंटी अवधि के भीतर हैं और तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं, उन्हें पुन: उपयोग में लाया जाता है, जबकि वारंटी समाप्त होने और खराब होने की स्थिति में ही उन्हें 'स्क्रैप' घोषित किया जाता है.
थ्री-फेज मीटरों के मामले में नियम थोड़े अलग हैं. यदि वे कार्यशील स्थिति में हैं, तो वारंटी की परवाह किए बिना उन्हें नए कनेक्शनों या कृषि उपभोक्ताओं के लिए आवंटित किया जा रहा है ताकि संसाधनों की बर्बादी न हो.
स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के दौरान भी पारंपरिक मीटरों की खरीद जारी रखने पर कंपनी ने तर्क दिया कि नियमों के तहत नए बिजली कनेक्शन देने की समय-सीमा (10 से 15 दिन) अनिवार्य है, जबकि स्मार्ट मीटर का प्रोजेक्ट एक दीर्घकालिक योजना है, इसलिए उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा देने हेतु पुराना स्टॉक बनाए रखना आवश्यक था.
नियामक आयोग ने बिजली कंपनी के तकनीकी स्पष्टीकरण और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के दिशानिर्देशों के साथ उनकी समानता को स्वीकार करते हुए इस याचिका को निराकृत कर दिया है.
हालांकि, सुनवाई के दौरान आयोग ने विभागीय कामकाज में एक बड़ी खामी को रेखांकित किया. आयोग ने पाया कि प्रोजेक्ट विंग और स्टोर एवं परचेज विंग के बीच आपसी तालमेल की भारी कमी रही है, जिसके कारण पुराने और नए मीटरों के ऑर्डर एक ही समय पर दे दिए गए.
हालांकि स्क्रैप मीटरों की नीलामी के लिए MSTC लिमिटेड के माध्यम से ई-ऑक्शन की व्यवस्था को पारदर्शी पाया गया, लेकिन आयोग ने भविष्य के लिए सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसी बड़ी योजनाओं में आंतरिक समन्वय को बेहतर बनाया जाए ताकि अनावश्यक खरीद और वित्तीय घाटे की स्थिति दोबारा पैदा न हो.