रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

धमतरी से देशभर में गूंजेगी ग्रीन आतिशबाजी

C

CG Khabar

03 सित. 2025, 03:53 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखे

रायपुर । संवाददाता: स्वच्छ आतिशबाज़ी का नया केंद्र बनकर धमतरी पूरे प्रदेश और देश को प्रेरणा देने जा रहा है. यह पहल न केवल रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित त्योहारों की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम साबित होगी.


धमतरी जिले के ग्राम चटोद में महिलाएँ अब पारंपरिक पटाखों की जगह पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पटाखों के निर्माण में जुटी हैं. यह पहल न केवल स्वच्छ और सुरक्षित दिवाली की राह दिखा रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और रोज़गार का नया द्वार भी खोल रही है.

विज्ञापन


कलेक्टर धमतरी ने श्री गणेशा फायरवर्क्स यूनिट का निरीक्षण किया. उन्होंने महिलाओं से संवाद कर उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता की जानकारी ली तथा मौके पर ग्रीन पटाखा चलाकर उसकी सुरक्षा और प्रभाव का अनुभव भी किया. 


इस यूनिट को पाँच एकड़ भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई है. निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए कि परिसर में अग्नि शमन की ठोस व्यवस्था, समय-समय पर मॉक ड्रिल और ज्वलनशील पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए. 


उन्होंने कहा कि चटोद में स्थापित यह यूनिट ‘लोकल से वोकल’ और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल है. इससे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है, वहीं समाज को स्वच्छ और सुरक्षित विकल्प प्राप्त हो रहा है.


यूनिट के सेल्स हेड आशीष सिंह ने बताया कि ग्रीन पटाखों में बारूद का प्रयोग नहीं होता, जिससे यह पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं और प्रदूषण भी नहीं फैलाते. वर्तमान में यहाँ लगभग 100 से अधिक महिलाएँ कार्यरत हैं, जिन्हें स्थायी रोजगार प्राप्त हुआ है. आने वाले समय में विवाह समारोहों और अन्य आयोजनों के लिए भी ग्रीन पटाखों की विभिन्न किस्में उपलब्ध कराईग्रीन पटाखे क्या हैं-


ग्रीन पटाखे ऐसे इको-फ्रेंडली पटाखे होते हैं जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में वातावरण में कम प्रदूषण फैलाते हैं और कम शोर करते हैं. इन्हें भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) द्वारा विकसित किया गया है. ग्रीन पटाखों में बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे हानिकारक रसायन कम या बिल्कुल नहीं होते हैं, और इनमें जल वाष्प छोड़ने वाले एडिक्टिव का उपयोग किया जाता है जो धूल को दबाते हैं. ये पटाखे हवा को सोखते हैं और कम पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं, जिससे वे अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं. 


ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% कम प्रदूषक होते हैं. कम एल्यूमीनियम और अधिक मैग्नीशियम के उपयोग से ये कम आवाज करते हैं. जल वाष्प या धूल शोषक पदार्थ हवा में मौजूद कणों को कम करते हैं. पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे हानिकारक रसायन नहीं होते हैं. 


CSIR ने ग्रीन पटाखों की तीन कैटेगरी बनाई हैं-

1. SWAS (सेफ वाटर रिलीज़): ये पटाखे जल वाष्प छोड़ते हैं जो हवा में धूल को सोख लेती है.

2. STAR (सेफ थर्माइट क्रैकर): इनमें पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर नहीं होता, जिससे कण उत्सर्जन और ध्वनि का स्तर कम होता है.

3. SAFAL (सेफफुल एल्युमीनियम): इनमें एल्युमीनियम का सुरक्षित और कम मात्रा में उपयोग किया जाता है, जिससे कम शोर होता है.


ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे करें

असली ग्रीन पटाखों पर एक QR कोड होता है. इस QR कोड को स्कैन करने पर आप पटाखा की निर्माता, लाइसेंस नंबर, और इस्तेमाल किए गए फार्मूले जैसी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP