छत्तीसगढ़: टाइगर के शिकार की 'सुपारी', नदी में जहर और ओडिशा का गैंग
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार की एक सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली साजिश का खुलासा हुआ है. पड़ोसी राज्य ओडिशा से आए शिकारियों ने न केवल बाघ को मारने की 'सुपारी' ली थी, बल्कि इसके लिए पूरे जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को दांव पर लगा दिया था.
वन विभाग की सतर्कता से इस बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया और कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
जांच में सामने आया कि यह कोई सामान्य शिकार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' थी. तस्करों ने बाघ की खाल के लिए स्थानीय गुर्गों को सक्रिय किया था. साजिश के तहत, जंगल के उन जलस्रोतों (नालों) में जहर मिलाया जा रहा था जहाँ बाघ और हाथी पानी पीने आते हैं.
विभाग को इसकी पहली भनक तब लगी जब हिरण के सींग के साथ रमन हेरना नामक एक बुजुर्ग को पकड़ा गया. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि कैसे ओडिशा के काटफाड़ और कुसुमखुंटा गांवों से जुड़ा एक नेटवर्क जंगल के रानीबरझोला नाले में जहर घोलकर वन्यजीवों को मारने की फिराक में है.
डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी की और 10 मई को छह और आरोपियों को नाले में जहर मिलाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया. इनके पास से जहर की शीशियां, मरे हुए केकड़े और मछलियां बरामद हुई हैं.
पकड़े गए सभी आरोपी ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के निवासी हैं, जिन्हें राजिम कोर्ट में पेश कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. फिलहाल, रिजर्व में थर्मल ड्रोन से निगरानी बढ़ा दी गई है और अंतर्राज्यीय सीमा पर हाई अलर्ट जारी है, क्योंकि इस संगठित नेटवर्क के कुछ और सदस्यों के फरार होने की आशंका है.