छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतें रखेंगी 'नागरिक रजिस्टर'
रायपुर । संवादददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए अब हर ग्राम पंचायत में एक 'नागरिक रजिस्टर' बनाने का फैसला किया है, जिसमें गांव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति, वहां से जाने वालों और नये आने वालों का ब्योरा दर्ज होगा.
यह कदम हाल ही में 30 बांग्लादेशी नागरिकों को राज्य से निर्वासित करने के बाद उठाया गया है और इसका उद्देश्य आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना और स्थानीय अधिकारों की रक्षा करना है.
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, "हमारा लक्ष्य पंचायत स्तर पर एक ऐसा रजिस्टर तैयार करना है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि गांव में पहले कौन रह रहा था, अब कौन रह रहा है और कौन नया आया है." यह रजिस्टर भौतिक रूप से पंचायत में रखा जायेगा, जिससे प्रशासन को हर व्यक्ति की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके.
पहले, नए लोगों की पहचान के लिये गांव के कोटवार और बुजुर्गों पर निर्भरता थी, लेकिन अनौपचारिक तंत्र के कारण कई बार जानकारी अधूरी रह जाती थी या जानबूझकर छिपाई जाती थी.
अब इस औपचारिक प्रणाली के लागू होने से प्रशासन को अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद है. अधिकारियों का कहना है कि राज्य में लगभग 2,000 पाकिस्तानी वीजा धारकों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है.
यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ की बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है, खासकर हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद. सरकार का मानना है कि यह प्रणाली न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय संसाधनों और अधिकारों को भी सुरक्षित रखेगी.
हालांकि, विपक्षी कांग्रेस ने इस कदम को 'राजनीतिक नाटक' करार दिया है.
कांग्रेस के पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर ने कहा, "यह पूरी तरह से चुनावी रणनीति है. कोटवार प्रणाली पहले से ही प्रभावी है. इस रजिस्टर के जरिये सरकार केवल भय और ध्रुवीकरण पैदा करना चाहती है." कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम आगामी चुनावों से पहले सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश है.
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय कल्याण के हित में लिया गया है. यह नई व्यवस्था छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.