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छत्तीसगढ़ CD कांड: विनोद वर्मा की याचिका पर HC ने CBI को जारी किया नोटिस

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18 मई 2026, 03:49 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

विनोद वर्मा
विनोद वर्मा

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की सियासत में करीब एक दशक पहले भारी भूचाल लाने वाले कथित अश्लील सीडी कांड का मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है. बिलासपुर उच्च न्यायालय ने इस बहुचर्चित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. 


यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा द्वारा निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती देने के बाद उठाया गया है, जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए गए थे. न्यायमूर्ति राधाकृष्ण अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की शुरुआती दलीलों को सुनने के बाद केंद्रीय एजेंसी से पक्ष मांगा है.


इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2017 से जुड़ी हैं, जब राज्य के तत्कालीन लोक निर्माण विभाग मंत्री राजेश मूणत से कथित तौर पर संबंधित एक अश्लील सीडी सामने आई थी. तब पुलिस ने मूणत की शिकायत पर कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और पत्रकार विनोद वर्मा के खिलाफ फर्जी सीडी बनाने और उसे प्रसारित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी. 


इसके साथ ही भाजपा कार्यकर्ता प्रकाश बजाज की शिकायत पर जबरन वसूली और आईटी एक्ट के तहत एक और मामला दर्ज किया गया था. इसी सिलसिले में पुलिस ने गाजियाबाद से विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया था, जिसके विरोध में भूपेश बघेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया के सामने वह सीडी जारी कर दी थी.


बाद में इस संवेदनशील मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. जांच एजेंसी ने अक्टूबर 2018 में दाखिल किए गए अपने आरोप पत्र में कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ भाजपा से जुड़े कैलाश मुरारका, विजय पांडे और कारोबारी विजय भाटिया को भी आरोपी बनाया. 


हालांकि, सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में यह स्वीकार किया था कि जिस शुरुआती शिकायत के आधार पर वर्मा के घर छापेमारी हुई थी, उसकी पुष्टि नहीं की जा सकी. इसके बावजूद, रायपुर में सीडी के वितरण को आधार बनाकर दोनों प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ दिया गया.


हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विनोद वर्मा के वकीलों ने तर्क दिया कि सीबीआई की खुद की चार्जशीट से यह स्पष्ट होता है कि उनके मुवक्किल के खिलाफ की गई शुरुआती कार्रवाई एक झूठी शिकायत पर आधारित थी. 


बचाव पक्ष का कहना है कि यह कथित फर्जी सीडी मुंबई में भाजपा से जुड़े नेताओं द्वारा तैयार कराई गई थी और इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री के एक अधिकारी की संलिप्तता की बातें भी सामने आई थीं. ऐसे में वर्मा पर सीडी बनाने का आरोप पूरी तरह निराधार है. 


वकीलों ने यह भी दलील दी कि पत्रकारों को एक सामग्री सौंपना जनता के बीच अश्लीलता फैलाने की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोप कानूनन सही नहीं हैं.


फिलहाल, रायपुर की सत्र अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए इसे एक अंतर्संबंधित आपराधिक साजिश का हिस्सा माना था और आरोपियों के खिलाफ आरोप बरकरार रखे थे. अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई महीने में होनी तय हुई है, जहां सीबीआई को अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करना होगा.


विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जिस तरह इस मामले ने तत्कालीन राजनीति को प्रभावित किया था, उसे देखते हुए कोर्ट के अगले रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP