बस्तर के माओवादियों से परिवार की पुकार, घर लौट आओ-सब चिंता करते हैं
रायपुर । संवाददाता: केंद्र सरकार द्वारा माओवाद को समाप्त करने के लिए तय की गई 31 मार्च की समयसीमा के करीब आने के साथ ही, छत्तीसगढ़ सरकार ने रेडिओ पर नया अभियान शुरू किया है. इस अभियान का उद्देश्य जंगलों में सक्रिय सशस्त्र माओवादी कैडरों को हिंसा त्यागने और मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करना है.
इसके तहत, उनके परिवार के सदस्यों द्वारा रिकॉर्ड की गई भावनात्मक अपीलों को छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में प्रसारित किया जा रहा है. बस्तर जैसे सुदूर माओवादी गढ़ों में रेडियो आज भी संचार का सबसे सुलभ और भरोसेमंद माध्यम बना हुआ है.
यह प्रसारण 5 फरवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा. इसके लिए सुबह 9 से 10 बजे और शाम 5 से 6 बजे का समय चुना गया है, क्योंकि अधिकारियों का मानना है कि इस दौरान माओवादी कैडर आवाजाही के विश्राम या शाम के जमावड़े के समय रेडियो सुन सकते हैं. हालांकि ये संदेश सार्वजनिक हैं, लेकिन इनका स्वरूप बेहद व्यक्तिगत है. गोंडी भाषा में प्रसारित इन संदेशों में कहा जा रहा है, "बाकी सब मुख्यधारा में लौट आए हैं. सरकार पुनर्वास का लाभ दे रही है. तुम भी वापस आ जाओ, घर पर जीवन बेहतर होगा."
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गहरे जंगलों में मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी के कारण रेडियो का चुनाव किया गया है. उन्होंने इसे 'घर की आवाज' बताया, न कि सरकारी प्रचार. विजय शर्मा ने कहा कि राज्य को उम्मीद है कि परिवार की आवाजें कैडरों को हथियार डालने के लिए मजबूर करेंगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि लौटने वालों को पुनर्वास उपायों के माध्यम से पूरा सहयोग दिया जाएगा.
आंकड़ों के अनुसार, देश भर के जंगलों में सक्रिय सशस्त्र कैडरों में से 85% से अधिक बस्तर या छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों से हैं, इसीलिए इस अभियान की शुरुआत बस्तर के लोगों की आवाजों से की गई है. सरकार आने वाले दिनों में इस अभियान का विस्तार करने की योजना बना रही है, जिसमें बस्तर के सामुदायिक प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों की अपीलें भी शामिल की जाएंगी.
इस अभियान के लिए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच गहरा समन्वय देखा जा रहा है. प्रसार भारती के आदेश पर जगदलपुर, रायपुर, कोठागुडेम, विशाखापत्तनम, गढ़चिरौली और बालाघाट सहित कई महत्वपूर्ण रेडियो स्टेशनों से इन संदेशों का प्रसारण सुनिश्चित किया गया है.