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20 साल अंधेरे में कैद रही बस्तर की 6 साल की मासूम

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05 दिस. 2025, 05:30 PM 2 मिनट में पढ़ें 4

लिसा का कमरा
लिसा का कमरा

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दूरस्थ ग्राम बकौवांड में एक ऐसी दर्दनाक कहानी सामने आई है, जो मानवता को शर्मसार कर देती है. 2000 में मात्र छह साल की उम्र में दूसरी कक्षा की छात्रा लिसा को गांव के ही एक व्यक्ति ने हत्या की धमकी दी थी. इस भयानक आघात ने न केवल उसकी बोलचाल छीन ली, बल्कि उसके पूरे बचपन को चुरा लिया.


 मां की अचानक मौत और पिता के बीमार पड़ने के बाद, सुरक्षा के नाम पर लिसा को उसके पिता ने एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया, जहां न खिड़की थी, न रोशनी. मात्र एक दरवाजे से खाना दिया जाता और फिर ताला लगा दिया जाता. इस तरह 20 लंबे साल बीत गए, और लिसा का किशोरावस्था भी उसी कैद में सिमट गई.

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दो दिन पहले राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग की एक टीम को इस भयावह सच्चाई की जानकारी मिली. टीम ने तुरंत कार्रवाई की और लिसा को उसकी कैद से मुक्त कराया. लेकिन आजादी की खुशी अधूरी है. लंबे समय तक अंधेरे में रहने के कारण लिसा की आंखों की रोशनी तेजी से कमजोर हो रही है. 


डॉक्टरों का कहना है कि वह पूरी तरह अंधी भी हो सकती है. इतना ही नहीं, भय और आघात के कारण लिसा अपना नाम तो बता पाती है, लेकिन बोलने की कला भूल चुकी है. उसके चेहरे पर डर का साया ऐसा है मानो कोई नागपाश उसे जकड़ रखा हो. पड़ोसियों और समवयस्क बच्चों से कटकर उसका बचपन वीरान हो गया.


लिसा के पिता ने बताया कि धमकी देने वाले व्यक्ति के भय से वह बेटी को बचाने के लिए मजबूर हो गए थे. लेकिन यह 'सुरक्षा' लिसा के लिए अभिशाप बन गई.


सामाजिक कल्याण विभाग अब लिसा का चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक इलाज कराने की तैयारी में जुटा है. विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते हस्तक्षेप से उसकी स्थिति सुधर सकती है. यह घटना ग्रामीण भारत में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. 


बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ऐसी मानसिक आघात की घटनाएं दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन लिसा की कहानी एक चेतावनी है कि अनदेखी भय कितना घातक हो सकता है. 


विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और धमकी देने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है. लिसा की जिंदगी अब नई शुरुआत की ओर बढ़ रही है, लेकिन उसके घावों को भरने में अभी लंबा सफर बाकी है.

(Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP