कैशलेस भारत: 5 साल में पेमेंट्स की बाढ़
नई दिल्ली । डेस्क: RBI की नई रिपोर्ट से साफ है कि भारत अब कैश से दूर हो रहा है. मोबाइल और ऐप्स से पैसे भेजना-लेना आसान हो गया. आइए सरल शब्दों में समझें क्या बदला:
कुल पेमेंट्स में उछाल:
संख्या (वॉल्यूम): 2019 में 3,248 करोड़ ट्रांजेक्शन → 2024 में 20,849 करोड़. यानी 6 गुना ज्यादा!
मूल्य (वैल्यू): ₹1,775 लाख करोड़ → ₹2,830 लाख करोड़. दोगुना से ज्यादा.
डिजिटल का राज: अब 99% से ज्यादा पेमेंट्स डिजिटल हैं. कैश लगभग खत्म!
UPI: छोटे पेमेंट्स का सुपरस्टार
2019: 1,079 करोड़ ट्रांजेक्शन (₹18 लाख करोड़ मूल्य).
2024: 17,221 करोड़ (₹247 लाख करोड़).
क्यों पॉपुलर? 24 घंटे चालू, आसान, मुफ्त. ज्यादातर चाय-पानी जैसे छोटे खर्चों के लिए.
अन्य सिस्टम्स की कहानी (संक्षेप में):
NEFT (बैंक ट्रांसफर): संख्या 3 गुना बढ़ी, मूल्य भी दोगुना.
RTGS (बड़े पेमेंट्स): संख्या दोगुनी, मूल्य 1.4 गुना.
क्रेडिट कार्ड: संख्या दोगुनी, मूल्य तिगुना. शॉपिंग का फेवरेट.
डेबिट कार्ड: संख्या और मूल्य दोनों कम. UPI ने ले लिया बाजार!
BBPS (बिल पेमेंट): संख्या 17 गुना, मूल्य 41 गुना. बिलर्स 134 से 22,000+.
IMPS: संख्या दोगुनी, मूल्य तिगुना. तुरंत पैसे भेजने के लिए.
NACH: सैलरी-बिल जैसे बड़े भुगतान बढ़े.
RBI क्या कहती है?
पिछले 5 सालों में डिजिटल पेमेंट्स 6 गुना तेज हुए. यह विकास सबके लिए आसान और सुरक्षित बना रहा. H1 2025 (जनवरी-जून) में ही ₹1,572 लाख करोड़ का कारोबार!