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क्या भारत ग्लोबल चिप रेस में टिक पाएगा?

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18 दिस. 2025, 05:45 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

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नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर मिशन के बीच यह सवाल बड़ा होता जा रहा है कि क्या भारत वैश्विक चिप बाजार में चीन, ताइवान और अमेरिका जैसे दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे पाएगा. हाल ही में गुजरात की केन्स सेमीकॉन द्वारा कैलिफोर्निया को चिप मॉड्यूल की पहली खेप निर्यात करना एक सकारात्मक संकेत तो है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 'ग्लोबल चिप हब' बनने की राह अभी भी चुनौतियों से भरी है. 


भारत वर्तमान में 28nm से 110nm वाले 'मैच्योर चिप्स' पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए जरूरी हैं, लेकिन 7nm और 3nm जैसी अत्याधुनिक तकनीक में भारत अभी भी वैश्विक रेस से काफी पीछे है.

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भारत की इस रेस में टिकने की क्षमता पर सबसे बड़ा सवाल परियोजनाओं में होने वाली देरी से उठ रहा है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियों की परियोजनाएं अपने शुरुआती लक्ष्य से पीछे चल रही हैं. 


जहाँ टाटा का 11 अरब डॉलर का फैब अब 2026 तक चालू होने की उम्मीद है, वहीं माइक्रोन की यूनिट भी अब दशक के उत्तरार्ध में पूरी क्षमता से काम कर पाएगी. 


इसके अलावा, भारत का प्रोत्साहन बजट (10 अरब डॉलर), चीन के 48 अरब डॉलर और अमेरिका के 53 अरब डॉलर के मुकाबले काफी कम है. 


विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत को वास्तव में टिकना है, तो उसे न केवल बुनियादी ढांचे और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी, बल्कि डिजाइन क्षेत्र में अपने मौजूदा दबदबे को मैन्युफैक्चरिंग में बदलने के लिए और अधिक आक्रामक प्रोत्साहन नीतियां लानी होंगी. 


अंततः, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में 'चीन प्लस वन' का विकल्प बनने के लिए भारत को अपनी नीतिगत स्पष्टता और कार्यान्वयन की गति को कई गुना बढ़ाना होगा.


सेमीकंडक्टर चिप

सेमीकंडक्टर चिप एक छोटी, पतली सिलिकॉन आधारित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है जिसमें लाखों-करोड़ों ट्रांजिस्टर लगे होते हैं, जिसे माइक्रोचिप या इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) भी कहते हैं, जो डेटा प्रोसेसिंग, स्टोरेज और सिग्नल कंट्रोल करके स्मार्टफोन, कंप्यूटर, कार, सैटेलाइट जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को 'दिमाग' की तरह चलाती है, और आधुनिक डिजिटल दुनिया का आधार है.


यह कंडक्टर (जैसे तांबा) और इंसुलेटर (जैसे रबर) का मिश्रण होती है, जिसकी चालकता (conductivity) को नियंत्रित किया जाता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP