डिजिटल लत और 'पॉपकॉर्न मेंटल स्टेट' से बाहर निकलें- रमन डेका
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका ने शुक्रवार को डिजिटल लत को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया है. उन्होंने युवा पीढ़ी से डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता और 'पॉपकॉर्न मेंटल स्टेट' (सोचने की क्षमता को प्रभावित करने वाली मानसिक स्थिति) से बाहर निकलने का आह्वान किया है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से लोग मात्र 30 दिनों के भीतर डिजिटल लत पर काफी हद तक काबू पा सकते हैं.
राज्यपाल डेका ने कहा कि डिजिटल लत का प्रभाव केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है. यह स्थिति गहरी सोच की क्षमता को प्रभावित करती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करती है.
उन्होंने बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से दूर रखने और उन्हें खेलकूद व बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि आज बच्चे घरों के भीतर सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र विकास प्रभावित हो रहा है.
चिकित्सा को मानवता की सेवा का माध्यम बताते हुए राज्यपाल ने युवा डॉक्टरों से उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखने और मरीजों के कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया.
उन्होंने 'फैमिली डॉक्टर' और 'पड़ोसी डॉक्टर' की अवधारणा को फिर से जीवित करने की आवश्यकता जताई और कहा कि आपातकालीन स्थिति में 'गोल्डन ऑवर' के दौरान समय पर मिला इलाज जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है.
उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकें दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती हैं.
समारोह में मौजूद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को न केवल खनिजों और कृषि बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होना चाहिए. उन्होंने नए डॉक्टरों से आदिवासी और सुदूर क्षेत्रों में संवेदनशीलता व करुणा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का आग्रह किया.
राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर अटल नगर में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता वाली एक अत्याधुनिक 'मेडिसिटी' विकसित की जा रही है. साथ ही रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी नए अस्पताल स्थापित करने का काम चल रहा है, ताकि लोगों को इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े.
इस दीक्षांत समारोह के दौरान मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नर्सिंग सहित विभिन्न संकायों के कुल 9,194 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 7,545 स्नातक, 1,645 स्नातकोत्तर और पांच सुपर-स्पेशियलिटी डिग्री धारक शामिल रहे. मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से भी नवाजा गया.