पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत एक 'ऐतिहासिक उलटफेर'- टीएस सिंह देव
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता टीएस सिंह देव ने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद अपनी विस्तृत और बेबाक प्रतिक्रिया साझा की है. सिंह देव ने स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल के नतीजों ने उन्हें पूरी तरह चौंका दिया है, क्योंकि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि भारतीय जनता पार्टी बंगाल की धरती पर 200 सीटों का विशाल आंकड़ा पार कर जाएगी.
उन्होंने कहा कि हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि भाजपा शायद साधारण बहुमत हासिल करने में सफल हो जाए, लेकिन 200 से अधिक सीटें जीतना एक ऐसा 'ऐतिहासिक उलटफेर' है जिसे न तो एग्जिट पोल भांप पाए और न ही बड़े राजनीतिक विश्लेषक.
पश्चिम बंगाल में दशकों से चली आ रही राजनीतिक हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद वहां का हिंसक चरित्र नहीं बदला है. उनके अनुसार, पहले कम्युनिस्टों के दौर में, फिर टीएमसी के शासन में और अब भाजपा के प्रचंड बहुमत के बाद भी हिंसा का एक ही पैटर्न देखने को मिल रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक है.
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंसा केवल सीमाओं पर दुश्मनों के खिलाफ स्वीकार्य है, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में इसका कोई स्थान नहीं होना चाहिए. इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की कथित ढिलाई और तीन लाख से अधिक अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के बावजूद स्थिति नियंत्रण में न आने पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल उठाए.
सिंह देव ने पड़ोसी राज्यों और अन्य क्षेत्रीय चुनावों पर भी अपनी राय रखी. ममता बनर्जी द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के फैसले पर उन्होंने कहा कि यद्यपि वह एक जुझारू व्यक्तित्व वाली नेता हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय तक स्वयं पैरवी करने का साहस रखती हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उनका इस्तीफा न देना उचित नहीं था.
दक्षिण भारत की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने तमिलनाडु में सुपरस्टार विजय की सक्रिय राजनीति में एंट्री को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया और कहा कि युवाओं व महिलाओं के बीच उनका भारी समर्थन वोटों में बदलना एक बड़ा बदलाव है.
केरल के संदर्भ में उन्होंने साफ किया कि वहां की जनता ने यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत देकर किसी भी प्रकार की गुप्त राजनीतिक सांठगांठ की अफवाहों पर विराम लगा दिया है.
असम के नतीजों पर उन्होंने परिसीमन और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को वहां अधिक सीटों की उम्मीद थी, लेकिन गौरव गोगोई की हार यह दर्शाती है कि वहां चुनावी लहर भाजपा के पक्ष में थी.