बिलासपुर के लोयोला स्कूल को नहीं मिलेगी संपत्ति कर में छूट
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश जेसुइट्स संस्था को एक बड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने बिलासपुर स्थित लोयोला हायर सेकेंडरी स्कूल को नगर निगम द्वारा भेजे गए लगभग 19.75 लाख रुपये के संपत्ति कर मांग नोटिस को सही ठहराया है.
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि संस्था अपनी किसी दूसरी शाखा या स्थान के नाम पर जारी आयकर अधिनियम की धारा 12A पंजीकरण प्रमाणपत्र के आधार पर बिलासपुर स्कूल के लिए टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकती.
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश जेसुइट्स नामक धर्मार्थ ट्रस्ट ने वर्ष 2005 में बिलासपुर के सीपत रोड पर लोयोला हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना की थी. बिलासपुर नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए स्कूल पर करीब 19.75 लाख रुपये का संपत्ति कर लगाते हुए 6 अगस्त 2021 और 2 सितंबर 2021 को मांग नोटिस जारी किए थे.
संस्था ने इन नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि वह एक धर्मार्थ और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है. छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम, 1961 की धारा 136(c) के तहत धारा 12A में पंजीकृत शिक्षण संस्थानों को संपत्ति कर से पूरी छूट मिलती है.
अदालत का फैसला और टिप्पणी
नगर निगम ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संस्था द्वारा प्रस्तुत धारा 12A का प्रमाणपत्र बिलासपुर स्थित स्कूल के नाम पर नहीं, बल्कि "द प्रेसिडेंट, मध्य प्रदेश जेसुइट्स, कुनकुरी, जिला रायगढ़" के नाम पर जारी किया गया था. बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद बिलासपुर संस्थान के नाम का वैध प्रमाणपत्र पेश नहीं किया जा सका.
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि कुनकुरी और बिलासपुर के दोनों संस्थान कानूनी रूप से एक समान नहीं हैं. अदालत ने कहा कि जब तक बिलासपुर स्कूल के नाम पर पृथक 12A पंजीकरण प्रमाणपत्र नहीं होता, तब तक उसे कर में पूर्ण छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता. न्यायालय ने नगर निगम के टैक्स नोटिस को पूरी तरह से तर्कसंगत मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया.