भूपेश बघेल ने 'धान खरीदी, वोटर लिस्ट और लैंड रेट' पर लगाए आरोप
रायपुर । संवाददाता: भूपेश बघेल ने धान खरीदी, वोटर लिस्ट और लैंड रेट पर लगाए गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ की मौजूदा सरकार पर धान खरीदी, वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और हाल ही में संशोधित भूमि दिशानिर्देश दरों में "गंभीर अनियमितताओं" का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है.
पत्रकारों से बात करते हुए, बघेल ने प्रशासन पर किसानों, मतदाताओं और छोटे भू-धारकों को "प्रणालीगत विफलताओं और दुर्भावनापूर्ण नीतियों" के माध्यम से संकट में धकेलने का आरोप लगाया.
बघेल ने कहा कि धान खरीदी संकट "कोई रहस्य नहीं" है और चेतावनी दी कि राज्य भर के किसान अभूतपूर्व बाधाओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कई मुख्य चिंताएं गिनाईं:
हजारों किसानों के नाम खरीदी सूची से हटाए गए.
सर्वर विफलताओं के कारण टोकन जनरेशन बाधित हो रहा है.
फर्जी डिजिटल फसल सर्वेक्षण और दोषपूर्ण गिरदावरी रिपोर्ट.
पात्र रकबे (एकरेज) में तेज कमी.
किसान आधिकारिक 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मुकाबले केवल 15–17 क्विंटल प्राप्त कर रहे हैं.
एग्रीटेक पोर्टल में भारी विसंगतियों के कारण रकबे में बड़े पैमाने पर कटौती.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा ने किसानों को बिचौलियों के सामने असुरक्षित छोड़ दिया है, जिससे जमीनी स्तर पर शोषण बढ़ रहा है.
बघेल ने वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर भी गंभीर संदेह व्यक्त किया. उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल अधिकारी (BLOs) "अत्यधिक दबाव" में हैं, और चुनाव आयोग के दावों पर सवाल उठाया:
यदि 80 मतदान केंद्रों ने SIR पूरा कर लिया है, तो वे सूची प्रकाशित करें.
वे कहते हैं कि 97% गणना शीट वितरित की गई हैं. वास्तविकता में, यह मुश्किल से 25% है.
तीन-चौथाई मतदाताओं को आवश्यक फॉर्म नहीं मिले हैं.
आयोग पर वोटर नाम हटाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाते हुए, बघेल ने तंज कसा और इसे "केंचुआ काटना" बताया: "हमने सांप या बिच्छू के काटने के बारे में सुना है, लेकिन क्या आपने कभी किसी को केंचुआ के काटने से मरते हुए सुना है?"
नई संशोधित दिशानिर्देश भूमि दरों को "तानाशाही और अवास्तविक" बताते हुए, बघेल ने दावा किया:
खुले बाजार में ₹1 लाख की ज़मीन को ₹2 करोड़ का दिशानिर्देश मूल्य दिया गया है.
बढ़ी हुई दरें व्यापक बैंकिंग धोखाधड़ी को जन्म दे सकती हैं.
यह नई संरचना न तो तार्किक है और न ही बाजार की स्थितियों को दर्शाती है, जिससे व्यवसाय और रोजगार के अवसर बुरी तरह प्रभावित होंगे.
रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों को लेकर चल रहे राजनीतिक बयानबाजी पर, बघेल ने सरकार पर जानबूझकर इस मुद्दे का फायदा उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "आज तक, उन्होंने एक भी आधिकारिक आंकड़ा प्रदान नहीं किया है. यह पूरी तरह से राजनीतिक शोषण है."
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ के बार-बार के दौरों की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनका उद्देश्य बड़े कॉर्पोरेट समूहों के लिए भूमि आवंटन को सुविधाजनक बनाना है. बघेल ने दावा किया, "मोदी सीएम विष्णु देव साय की तारीफ करते हैं ताकि अडानी और अंबानी को ज़मीन सौंपी जा सके. उनकी नज़र आदिवासी ज़मीनों के नीचे मौजूद कोयले पर है."