जोमैटो और गिग वर्कर्स यूनियन के बीच छिड़ी जंग
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के तेजी से बढ़ते फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर में डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर विवाद गहरा गया है. जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कंपनी के गिग वर्क मॉडल का बचाव किया, जिस पर तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स एसोसिएशन (TGPWA) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इन परिस्थितियों को 'अशोभनीय काम' करार दिया है.
गोयल के अनुसार, 2025 में जोमैटो डिलीवरी पार्टनर्स की औसत कमाई 102 रुपये प्रति घंटा रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.9 प्रतिशत अधिक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गणना में प्लेटफॉर्म पर लॉग-इन रहने का पूरा समय शामिल है.
गोयल ने तर्क दिया कि यह एक बिना किसी बाधा के प्रवेश वाली 'अनस्किल्ड' नौकरी है, जिसमें काम के घंटों की लचीलापन, 100 प्रतिशत टिप और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं.
उन्होंने 10 मिनट की डिलीवरी के दबाव को भी खारिज करते हुए कहा कि डिलीवरी पार्टनर्स की औसत ड्राइविंग गति मात्र 16 से 21 किमी प्रति घंटा रहती है.
इसके विपरीत, तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स एसोसिएशन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. एसोसिएशन का तर्क है कि ईंधन और वाहन के रखरखाव के खर्च को घटाने के बाद डिलीवरी पार्टनर की वास्तविक कमाई घटकर मात्र 81 रुपये प्रति घंटा रह जाती है.
उनके अनुसार, महीने में 26 दिन और रोजाना 10 घंटे काम करने के बावजूद एक कर्मचारी मुश्किल से 21,000 रुपये कमा पाता है.
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म भले ही गति का दबाव न बनाने का दावा करें, लेकिन खराब रेटिंग और जुर्माने का डर डिलीवरी पार्टनर्स को असुरक्षित ड्राइविंग के लिए मजबूर करता है.
टिपिंग के मुद्दे पर एसोसिएशन ने बताया कि केवल 5 प्रतिशत ऑर्डर्स पर ही टिप मिलती है, जो प्रति घंटे के हिसाब से औसतन 2.6 रुपये बैठती है.
इसके अलावा, सवैतनिक अवकाश और भविष्य निधि जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति को लेकर यूनियन ने जोमैटो के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं.