युक्तियुक्तकरण को लेकर बस्तर के शिक्षकों का विरोध
छत्तीसगढ़ के बस्तर में युक्तियुक्तकरण का विरोध कर रहे शिक्षक
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ अब शिक्षक खुलकर सामने आ रहे हैं. बस्तर जिले के सैकड़ों शिक्षक जगदलपुर कलेक्ट्रेट में इकट्ठा हुए, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है.
शिक्षकों का साफ कहना है कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर उन्हें जबरन दूसरी जगह भेजा जा रहा है. न तो उनकी सहमति ली जा रही है और न ही घर-परिवार या बच्चों की पढ़ाई की कोई चिंता की जा रही है.
शिक्षकों ने कहा कि हम 15–20 साल से एक ही स्कूल में सेवा दे रहे हैं. बच्चों को पढ़ाने में पूरा मन लगाते हैं, लेकिन अब अचानक युक्तियुक्तकरण के नाम पर हमें वहां से हटा दिया जा रहा है, जहां हमारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.
इसके अलावा जहां पर पद रिक्त नहीं है फिर भी हमको जबरन वहां भेजा जा रहा है. यह ना सिर्फ हमारे लिए बल्कि छात्रों की पढ़ाई के लिए भी नुकसानदायक है.
कई शिक्षकों ने यह भी बताया कि जब वे अधिकारी से अपनी समस्या रखने गए, तो उनसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. शिक्षक खुद को असहाय और अनसुना महसूस कर रहे हैं.
शिक्षकों की बातों से साफ है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है.
शिक्षकों ने की दोबारा विचार करने की मांग
शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव गौतम श्रीनिवास और शिक्षक सतपाल सिंह का कहना है कि युक्तियुक्तकरण में शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा आदेश जारी किए जा रहे हैं.
बिना जानकारी दिए उनकी पोस्टिंग की जा रही है. ऐसे कई स्कूल हैं, जहां पहले से ही शिक्षकों की पूर्ति है. बावजूद इसके ऐसे स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की पोस्टिंग की जा रही है, जो कि सरासर गलत है.
ऐसे में बस्तर जिले के शिक्षकों ने युक्तियुक्तकरण को लेकर दोबारा विचार करने की मांग राज्य सरकार से की है.
शिक्षकों को नहीं उठानी पड़ेगी परेशानी
इधर जगदलपुर के जिला कलेक्ट्रेट में अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग पिछले दो दिनों से शुरू कर दी गयी है. जिसके तहत बस्तर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में मौजूद शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक विद्यालयों में शिक्षक की पोस्टिंग करने, इसके साथ ही अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा की गारंटी देने की बात कही जा रही है.
जिला शिक्षा अधिकारी बलराम बघेल का कहना है कि बस्तर जिले में भी अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
जिसके तहत निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ अतिशेष शिक्षकों को शिक्षकविहीन विद्यालय और शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में पदस्थ किया जा रहा है.
सबसे पहले प्राथमिक शालाओं के सहायक शिक्षकों और प्रधान अध्यापक और माध्यमिक शालाओं के प्रधान अध्यापक की काउंसलिंग की गई और इस प्रक्रिया में लगभग 202 सहायक शिक्षकों और 15 प्रधान पाठक की काउंसलिंग की गई.
इसी तरह अतिशेष व्याख्याता और माध्यमिक शाला के शिक्षकों की काउंसलिंग में 152 व्याख्याता और माध्यमिक शाला के 186 शिक्षकों की काउंसलिंग की गई.
विद्यालय के अतिशेष व्याख्याताओं को उन विद्यालय में पदस्थ किया गया है, जहां गणित, रसायन, भौतिकी ,हिंदी ,अंग्रेजी, कॉमर्स विषयों के शिक्षकों की कमी थी.
जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि अतिशेष शिक्षकों की नई जगह पर पदस्थापना से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो गई है.
वहीं इन विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी शासन द्वारा जारी आदेश के तहत की गई युक्तियुक्तकरण की व्यवस्था लाभदायक होने जा रही है.
जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है की युक्तियुक्तकरण से कहीं भी शिक्षकों या फिर बच्चों को स्कूलों में पढ़ाई से संबंधित किसी तरह की दिक्कत और परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी.