बस्तर: खाद-बीज संकट और कालाबाजारी के खिलाफ किसान कांग्रेस का आक्रोश
जगदलपुर । संवाददाता: बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में किसानों को आ रही दिक्कतों को लेकर अब सियासत गरमा गई है. कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद अन्नदाताओं को खाद, बीज और डीजल जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है. इसी सिलसिले में गुरुवार को जगदलपुर में किसान कांग्रेस ने एक विशाल आक्रोश रैली निकालकर प्रशासन के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया.
रैली के समापन पर कांग्रेस पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. कांग्रेस ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे जिले में और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा.
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य और जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष दयाराम कश्यप संयुक्त रूप से कर रहे थे.
रैली में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हिस्सा लिया और वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खरीफ के मौजूदा सीजन में किसानों को समय पर खाद-बीज मुहैया नहीं हो पा रहा है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है.
मामले पर बोलते हुए जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष दयाराम कश्यप ने सरकार के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अन्नदाता देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं, लेकिन आज उन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है.
संगठन लगातार किसानों की आवाज उठा रहा है, मगर सत्ता में बैठी सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन बनी हुई है और किसानों की जायज समस्याओं को सुनने तक के लिए तैयार नहीं है.
वहीं, शहर जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने प्रशासनिक ढिलाई और भ्रष्टाचार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी उदासीनता के चलते इलाके में जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं.
आम किसान मजबूरी में ऊंचे दामों पर कृषि उत्पाद खरीदने को मजबूर है और उनका लगातार शोषण हो रहा है. मौर्य ने आरोप लगाया कि एक तरफ किसान खाद, बीज और पेट्रोल-डीजल के गंभीर संकट से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार धरातल पर काम करने के बजाय केवल अपनी झूठी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार में व्यस्त है.