बलरामपुर: नाबालिग आदिवासी मजदूर की संदिग्ध मौत पर बवाल
बलरामपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने अब प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर तूल पकड़ लिया है. लुधियाना में मजदूरी करने गए 17 वर्षीय आदिवासी किशोर युवराज सिंह की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत के बाद सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग (छत्तीसगढ़) आक्रामक रुख अपना रहा है.
संगठन ने मंगलवार को सरगुजा संभाग के कमिश्नर और आईजी को ज्ञापन सौंपकर घटना के जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने की गुहार लगाई है. समाज ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे.
पूरा मामला बलरामपुर के ग्राम चेरा का है, जहां खैरवार जनजाति (अनुसूचित जनजाति) से ताल्लुक रखने वाले युवराज सिंह को करीब तीन माह पूर्व पाइप लाइन कार्य के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना ले जाया गया था. परिजनों का आरोप है कि स्थानीय ठेकेदार लक्ष्मी यादव (निवासी ग्राम महादेवपुर) और शशिकांत (निवासी दुद्धी, उत्तर प्रदेश) किशोर को बिना पारिवारिक सहमति के ले गए थे.
इस दौरान न तो उसे तीन महीने का पारिश्रमिक दिया गया और न ही उसकी देखभाल की गई. बीती 5 सितंबर को दोनों ठेकेदार गंभीर रूप से बीमार और बेसुध युवराज को एंबुलेंस से उसके सूने घर छोड़ आए, जहां देर शाम परिजनों के लौटने के कुछ ही देर बाद उसकी सांसें थम गईं.
इस घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष उदय कुमार पण्डो के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में ठेकेदारों पर बाल श्रम, मानव तस्करी और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
संगठन का कहना है कि किशोर की तबीयत बिगड़ने पर उसे घर लाकर लावारिस छोड़ने के बजाय अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था, लेकिन ठेकेदारों ने गंभीर लापरवाही बरतते हुए परिवार को उसकी बीमारी की भनक तक नहीं लगने दी.
समाज ने मांग की है कि घटना में शामिल सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा पीड़ित माता-पिता (शिवकुमारी और सुदामा सिंह) को शासन के नियमानुसार उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए.