सशस्त्र माओवादी ढेर, पर राजनीतिक दलों में घुसे 'दिमागी नक्सल': PM नरेंद्र मोदी
बस्तर में CRPF जवानों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया बड़ा बयान— कहा, सशस्त्र माओवादियों के खात्मे के बाद अब 'दिमागी नक्सल' लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ लोगों को भड़का रहे हैं.
बस्तर । संवाददाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 8 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कैंप में सुरक्षाकर्मियों के साथ दीपावली मनाई. इस मौके पर राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश से सशस्त्र माओवादियों का सफाया हो चुका है, लेकिन 'दिमागी नक्सलियों' (वैचारिक समर्थकों) ने कई राजनीतिक दलों और संगठनों में अपनी पैठ बना ली है. ये तत्व लगातार लोगों को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़का रहे हैं. प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा के लिए ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें परास्त करने का आह्वान किया.
31 मार्च 2026 को देश हुआ था नक्सलमुक्त, पर खतरा अभी टला नहीं
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि सरकार ने 31 मार्च 2026 को देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया था. हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि माओवादियों के खात्मे के बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. जंगलों से हथियारबंद नक्सली तो गायब हो चुके हैं, लेकिन 'दिमागी नक्सलियों' ने कई संस्थाओं पर कब्जा जमा लिया है. इससे पहले अगस्त 2026 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी प्रधानमंत्री ने 'दिमागी नक्सलियों' का जिक्र करते हुए कहा था कि देश सशस्त्र नक्सलवाद को हराने में तो सफल रहा, पर इसके वैचारिक समर्थक हिंसा को बढ़ावा देने के मौके तलाश रहे हैं.
राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव और पुराने दौर पर तीखा हमला
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे संघर्ष को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय देश के 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले वामपंथी उग्रवाद की चपेट में थे. हर साल करीब 2,000 नक्सली हमले होते थे और शाम ढलते ही हजारों गांवों में जिंदगी थम जाती थी. पिछली सरकारों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि 2004 से 2013 के बीच मारे गए नक्सलियों की तुलना में अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए. महलों में रहने वाले 'नामदारों' की आंखों से शहीदों के लिए एक आंसू तक नहीं निकला. तत्कालीन सरकारों ने नक्सलवाद को असाध्य बीमारी मानकर अपने हाल पर छोड़ दिया था और सुरक्षा बलों के हाथ बांध रखे थे. वर्ष 2014 में सरकार बदलने के बाद इस राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को दूर किया गया और जवानों को फैसले लेने की पूरी छूट दी गई.
फंडिंग नेटवर्क ध्वस्त, हथियार आपूर्ति और भर्ती पर लगी रोक
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा उठाए गए कड़े और अप्रत्यक्ष कदमों ने नक्सलियों तथा अलगाववादियों की फंडिंग रीढ़ तोड़ दी. जाली नोटों के रैकेट को खत्म कर दिया गया, जिससे उनकी वित्तीय कमर टूटने के साथ-साथ हथियारों की सप्लाई लाइन पूरी तरह बंद हो गई और नई भर्तियों पर लगाम लग गई. संवेदनशील दृष्टिकोण और सेवा भावना से काम करने का ही नतीजा है कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान एक भी CRPF जवान की जान नहीं गई, जो कि पिछले 47 सालों में पहली बार हुआ है.
12 वर्षों में गरीबी उन्मूलन और विकास की नई मिसाल
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 12 सालों में भारत ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ जंग जीती है, बल्कि गरीबी से लड़ाई में भी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं. जो काम दशकों तक 'गरीबी हटाओ' के नारे नहीं कर सके, उसे देश ने महज 12 वर्षों में पूरा कर दिखाया. अनुच्छेद 370 को हटाने, शौचालय निर्माण और टीकाकरण अभियान की सफलताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि भारत गरीबी उन्मूलन, नशामुक्त भारत और आत्मनिर्भर विकसित भारत के अपने संकल्पों को भी जरूर पूरा करेगा.