बैंक लॉकर से चोरी: उपभोक्ता अदालत ने SBI को माना जिम्मेदार, पीड़ित को मिलेगा मुआवजा
बैंक लॉकर से गहने और दस्तावेज चोरी होने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला. सुरक्षा में लापरवाही पर एसबीआई को मुआवजा देने का आदेश.
रायपुर । संवाददाता: जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक मानते हुए पीड़ित दंपती के हक में फैसला सुनाया है. अतिरिक्त पीठ के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस ने 2 नवंबर 2026 को सुनाए अपने फैसले में सड्डू के शिवाजी पार्क निवासी अंजू और सुनील मिश्रा की शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया.
आयोग ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित दंपती को चोरी हुए आभूषणों की एवज में 21,71,328 रुपए, मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपए तथा वाद व्यय के लिए 15 हजार रुपए का भुगतान करे. मुआवजा देने से इनकार करने के बैंक के रवैये को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया गया है.
आयोग की जांच में बैंक प्रबंधन की कई स्तरों पर लापरवाही उजागर हुई. यह बात सामने आई कि बैंक ने लॉकर समेत अपनी शाखा को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया था, परंतु इसकी कोई भी जानकारी फोन, संदेश या पंजीकृत डाक द्वारा पीड़ित दंपती को नहीं दी गई. इसके अतिरिक्त, छुट्टियों के दौरान बैंक परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे और न ही पुलिस सुरक्षा प्राप्त करने के लिए कोई आवश्यक कदम उठाए गए थे.
सुनवाई के दौरान बैंक ने लॉकर समझौते की शर्तों का हवाला देते हुए नुकसान की भरपाई से बचने का प्रयास किया, लेकिन आयोग ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि समझौते में गैस कटर से लॉकर काटकर चोरी किए जाने का कोई जिक्र नहीं है, इसलिए बैंक केवल करार का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता.
यह पूरा विवाद वर्ष 2017 में हुई एक भीषण चोरी की वारदात से जुड़ा है. अंजू और सुनील मिश्रा ने 27 अप्रैल 2013 को 764 रुपए वार्षिक किराए पर बैंक का संयुक्त लॉकर नंबर 8 लिया था. 24 और 25 नवंबर 2017 की मध्यरात्रि अज्ञात चोरों ने बैंक में प्रवेश कर गैस कटर से लॉकरों को काट डाला था, जिसमें दंपती के सोने-चांदी के बहुमूल्य गहने तथा जमीन के मूल दस्तावेज चोरी हो गए थे.
बैंक प्रबंधन और पुलिस को इस घटना की भनक 27 नवंबर की सुबह शाखा खुलने पर लगी, क्योंकि चोरों ने सीसीटीवी कैमरों के कनेक्शन भी काट दिए थे. पीड़ित दंपती ने अपनी शिकायत के समर्थन में गहनों की विस्तृत सूची, 62 खरीदारी बिल और आभूषण पहने हुए तीन तस्वीरें आयोग के समक्ष प्रस्तुत की थीं, जिसके आधार पर चोरी के समय के आभूषण मूल्यों को आयोग द्वारा सर्वथा उचित ठहराया गया.