बीजापुर में एक और शिक्षादूत की हत्या
बीजापुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक और शिक्षादूत की कथित माओवादियों ने हत्या कर दी दी है. गंगालूर थाना क्षेत्र के ग्राम नेन्द्रा में पदस्थ शिक्षादूत कल्लू ताती (25 वर्ष) की बीती रात धारदार हथियार से गला रेत कर मौत की सजा दी गई है.
इस घटना से इलाके में भारी दहशत का माहौल है. माओवादियों ने अब तक 9 शिक्षादूतों की हत्या की है.
ग्रामीणों के मुताबिक शुक्रवार की शाम को शिक्षादूत कल्लू ताती नेन्द्रा स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर अपने घर लौट रहा था.
इस बीच रास्ते से कथित माओवादियों ने उनका अपहरण कर अपने साथ ले गए थे. शिक्षादूत कल्लू ताती तोड़का गांव के रहने वाले थे.
माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी करने का आरोप लगाकार पहले उसके साथ मारपीट की. फिर देर रात को धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी.
माओवादियों ने शिक्षादूत को मारने के बाद शव को गांव के पास लाकर फेंक दिया था. शनिवार की सुबह ग्रामीणों ने गांव के बाहर शव को देखा.
तत्काल इसकी सूचना परिजनों सहित पुलिस को दी. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है.
हालांकि घटनास्थल से कोई भी माओवादी पर्चा बरामद नहीं हुआ है.
अब तक 9 शिक्षादूतों की हत्या
पुलिस के मुताबिक माओवादी बस्तर क्षेत्र में पुलिस मुखबिर होने के संदेह में शिक्षादूतों को निशाना बना रहे हैं. पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है.
पिछले तीन वर्षों में बस्तर क्षेत्र के चार जिलों में माओवादियों ने 9 शिक्षादूतों की हत्या की है, जिनमें से पांच हत्याएं इसी वर्ष हुईं.
इससे पहले 27 अगस्त को सुकमा जिले में माओवादियों ने एक शिक्षादूत की हत्या कर दी थी.
उससे पहले 18 अगस्त को कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के बिनागुंडा गांव में माओवादी संगठन ने कथित जनअदालत लगाकर एक आदिवासी युवक की हत्या कर दी थी.
माओवादियों ने युवक को पुलिस का मुखबिर करार देते हुए सैकड़ों ग्रामीणों के सामने मौत की सजा सुनाई और निर्ममता से उसकी हत्या कर दी थी.
वहीं बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर जिले में 15 अगस्त को भी एक शिक्षादूत की हत्या की गई थी.
पिछले महीने बीजापुर जिले के फरसेगढ़ इलाके में माओवादियों ने पुलिस मुखबिर होने के शक में दो शिक्षादूतों की हत्या कर दी थी.
पड़ोसी जिले दंतेवाड़ा में 19 फरवरी को भी इसी तरह के आरोप में एक शिक्षादूत समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई थी.
बंद स्कूलों के दोबारा संचालन से बौखलाहट
बस्तर में माओवादी बंद पड़े स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद से शिक्षादूतों को निशाना बना रहे हैं.
माओवादी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अधिकांश स्कूल भवनों को ध्वस्त कर दिया था. जिसके चलते बस्तर के कई स्कूलों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा था.
धीरे-धीरे माहौल बदला और माओवादियों की दहशत कम हुई तो सरकार ने बंद स्कूलों को दोबारा संचालन शुरू किया.
इन स्कूलों में स्थानीय युवाओं ने बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया. बन्द स्कूलों के पुनः संचालन होने से माओवादी बौखला गए हैं और शिक्षादूतों को अपना निशाना बना रहे हैं.