बस्तर में आंगनबाड़ी: कहीं किराये का कमरा तो कहीं झोपड़ी
छत्तीसगढ़ के बस्तर में आंगनबाड़ी केन्द्रों की हालत दयनीय
बस्तर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्त बस्तर बनाने के लिए प्रदेश सरकार हर साल महिला बाल विकास विभाग के लिए करोड़ों रुपए का बजट बनाती है. साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये कुपोषित बच्चों में सुधार लाने पूरी राशि खर्च करने का दावा करती है.
दूसरी तरफ बस्तर में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य को अलग हुए 25 साल बीत चुके हैं. इसके बावजूद आज भी बस्तर के ऐसे कई इलाके हैं, जहां महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी केंद्र कहीं किराए के कमरे में तो कहीं झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं.
हर साल नये आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए राशि स्वीकृति तो होती है, लेकिन अधिकारी और जनप्रतिनिधि अन्य समस्याओं के चलते आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण नहीं होने की बात कहते हैं.
पूरे बस्तर संभाग के 7 जिलों में किराये में संचालित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या सैकड़ों में है. वहीं बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आज भी झोपड़ियों व क्षतिग्रस्त मकानों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहाँ हमेशा बच्चों को जान का खतरा बना रहता है. इसके अलावा संभाग मुख्यालय जगदलपुर में भी कुछ इसी तरह के ही हालात बने हुए हैं.
138 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए भवन ही नहीं
बस्तर संभाग के जिला मुख्यालय जगदलपुर की ही बात करें तो ना तो यहां अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन हैं, ना ही बेहतर इंतजाम, गंदगी और खराब भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किये जा रहे हैं.
बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग के पास अब तक 138 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन ही उपलब्ध नहीं हैं.
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी हेमंत साहू का कहना है कि इन आंगनबाड़ी केंद्रों को किराए के मकान में संचालित किया जा रहा है. इन भवनों के निर्माण के लिए निगम को 77 भवन बनाने के लिए 4 करोड़ 70 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे.
जिनमें से 29 भवनों का निर्माण जमीन विवाद के चलते निरस्त हो गया और बाकी बचे भवनों का 5 सालों बाद भी अब तक निर्माण नहीं हो पाया.
विभाग का 70 हजार जा रहा किराए में
विभाग की शहरी परियोजना को हर महीने करीब 70 हजार रुपए आंगनबाड़ी केंद्र संचालन के लिए किराए पर देना पड़ रहा है. इतना ही नही आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन मापदंड के भी अनुकूल नहीं हैं.
आंगनबाड़ी केंद्रों में गंदगी, सीलन और बच्चों के समान के रखरखाव की भी बड़ी समस्या है.
विभाग ने शहरी परियोजना के अंतर्गत 77 भवनों के निर्माण के लिए साल 2018-19 में नगर निगम को कुल 4 करोड़ 70 लाख रुपए निर्माण के लिए दिए थे, लेकिन इनमें एक भी जगह भवन नहीं बनाया गया.
जिसकी वजह से आंगनबाड़ी आने वाले बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए जमीन तलाश रहा निगम
वहीं नगर निगम के महापौर संजय पांडे का कहना है कि निगम के पास भवन बनाने के लिए अभी स्थल मौजूद नहीं है. स्थल चयन की जिम्मेदारी महिला एवम बाल विकास विभाग को भी उठानी चाहिए.
हालांकि 77 भवन निर्माण में 29 भवन जमीन विवाद के चलते निरस्त हो चुके हैं और उसका 32 लाख रूपये वापस कर दिया गया है.
बचे हुए भवनों के लिए जमीन तलाश की जा रही है.