5 साल में करेंगे बस्तर के 50 साल की भरपाई-अमित शाह
जगदलपुर | संवाददाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि पिछले 50 वर्षों में बस्तर ने जो पीड़ा और नुकसान झेला है, उसकी भरपाई आने वाले 4-5 वर्षों में विकास के जरिए की जाएगी. शाह ने स्पष्ट कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा.
नेतानार में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है. उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में हुए प्रयासों के बाद अब यह पूरा इलाका फिर से आदिवासी संस्कृति और जनजीवन से आबाद दिखाई देने लगा है. शाह ने अमर शहीद गुंडाधुर को याद करते हुए कहा कि इसी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की मशाल जली थी.
उन्होंने बस्तर के उस दौर को भी याद किया, जब नक्सल हिंसा अपने चरम पर थी. शाह ने कहा कि कभी यहां एक साथ छह पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी जाती थी, स्कूलों को उजाड़ दिया जाता था और गरीबों का राशन तक लूट लिया जाता था. नक्सलियों का आतंक इतना था कि मासूम बच्चों को भी जबरन अपने साथ ले जाया जाता था.
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार की सख्त कार्रवाई और सुरक्षा बलों के लगातार अभियान के चलते अब बस्तर से बंदूक और भय के उस दौर का लगभग अंत हो चुका है. उन्होंने घोषणा की कि अब इस ऐतिहासिक भूमि को एक नए तीर्थ और विकास केंद्र के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा.
अमित शाह ने कहा कि बस्तर के आदिवासी बच्चों को अब वही आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं, जो बड़े शहरों में उपलब्ध होती हैं. सरकार हर गरीब परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने, राशन और आधार कार्ड बनवाने तथा 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज जैसी सुविधाएं सुनिश्चित कर रही है.
नेतानार कार्यक्रम के बाद अमित शाह जगदलपुर स्थित आसना की बादल अकादमी पहुंचे, जहां बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनआईए, एसएसबी और एनटीआरओ के अधिकारियों को सम्मानित किया गया. इस दौरान छत्तीसगढ़ के एडीजी विवेकानंद सिन्हा और बस्तर आईजी सुंदरराज पी को भी सम्मानित किया.
कार्यक्रम में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और सुरक्षा बलों के जवानों ने भी गृह मंत्री से बातचीत की. जवानों ने बनक्सलियों के एनकाउंटर की जानकारी साझा की, जबकि प्रभावित परिवारों ने अपने संघर्ष और बदले हालात की कहानी सुनाई.