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अंबिकापुर: महापौर मंजूषा भगत ने सामाज से बहिष्कृत महिला का कराया अंतिम संस्कार

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31 जुल. 2026, 10:23 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

 मंजूषा भगत
मंजूषा भगत

अंबिकापुर । संवाददाता: सामाजिक वर्जनाओं और बहिष्कार से परे जाकर इंसानियत निभाने का एक भावुक कर देने वाला मामला अंबिकापुर से सामने आया है. शहर के शंकरनगर की रहने वाली 75 वर्षीय सावित्री बाई की मृत्यु के बाद जब उनके अपने परिजनों और समाज ने मुंह मोड़ लिया, तब स्थानीय महापौर मंजूषा भगत ने आगे बढ़कर पूरी जिम्मेदारी उठाई. 


नगर निगम की टीम के सहयोग से उन्होंने पूरे विधि-विधान, रीति-रिवाजों और सम्मान के साथ वृद्धा को अंतिम विदाई दी. इस संवेदनशीलता और मानवीय पहल की अब पूरे शहर में जमकर सराहना हो रही है.


दरअसल, सावित्री बाई ने वर्षों पहले अपने पहले पति के निधन के बाद दूसरी जाति के व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिया था. इस फैसले के कारण उनके परिवार और समाज ने उनसे दूरी बनाते हुए उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया था. जीवन के अंतिम क्षणों तक वे इस उपेक्षा का सामना करती रहीं. 


महिला के निधन के बाद भी जब कोई रिश्तेदार या सामाजिक प्रतिनिधि शव यात्रा में शामिल होने नहीं पहुंचा, तो स्थिति बेहद पीड़ादायक हो गई. हालांकि, उनके दूसरे पति अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों तथा संतान न होने के कारण वे असमर्थ रहे.


घटना की भनक लगते ही महापौर मंजूषा भगत तुरंत शंकरनगर पहुंचीं और नगर निगम के कर्मचारियों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार की संपूर्ण व्यवस्था कराई. वे प्रक्रिया संपन्न होने तक स्वयं वहां मौजूद रहीं. इस अवसर पर महापौर ने भावुक होते हुए कहा कि मृत्यु के पश्चात भी किसी को अपनों का साथ न मिलना समाज के लिए एक गंभीर चिंतन का विषय है. 


उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक कर्तव्यों का प्रतीक है. महापौर के इस कदम ने न केवल एक मृत आत्मा को गरिमा दी, बल्कि समाज के सामने जिम्मेदारी और इंसानियत का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP