छात्रों को नमाज के लिए मजबूर करने का आरोप: प्रोफेसर की याचिका HC में खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है. प्रोफेसर दिलीप झा पर पिछले साल राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) शिविर के दौरान हिंदू छात्रों को कथित तौर पर नमाज अदा करने के लिए मजबूर करने का आरोप है.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जो मुकदमे (ट्रायल) का सामना करने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं.
अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चरण में इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि यह कार्रवाई किसी दुर्भावना या गलत इरादे से शुरू की गई थी.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 30 मार्च 2025 की है, जब ईद-उल-फितर के अवसर पर मुस्लिम छात्रों के साथ अन्य छात्रों को भी बिना उनकी सहमति के नमाज में शामिल होने के लिए कथित तौर पर मजबूर किया गया था.
आरोप है कि आपत्ति जताने वाले छात्रों को उनके प्रमाण पत्र रद्द करने की धमकी दी गई और उन्हें डराया-धमकाया गया.
हालांकि, प्रोफेसर झा के वकील ने दलील दी कि वे केवल प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर थे और घटना के समय वहां उपस्थित नहीं थे, लेकिन हाईकोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि इन तथ्यों की जांच ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और जिरह के माध्यम से की जानी चाहिए.
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद असाधारण क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर मुकदमे की प्रक्रिया को बीच में रोकना उचित नहीं है.