इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन
नई दिल्ली । डेस्क: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम एक गंभीर विवाद में घिर गया है. बीबीसी की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम अपने विशाल यूजर बेस को बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन दिखा रहा है. इस मामले के सामने आने के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय (MeitY) को मेटा को समन जारी करने का निर्देश दिया है.
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम पर दिखाए जा रहे इन विज्ञापनों में "रेप वीडियो" और "चाइल्ड वीडियो" जैसे शब्दों का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा था. ये विज्ञापन कथित तौर पर यूजर्स को सीधे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम' पर रीडायरेक्ट कर रहे थे, जहां ऐसी संवेदनशील और अवैध सामग्री महज 99 रुपये जैसी मामूली कीमत पर बेची जा रही थी.
बीबीसी ने भारत में एक टेस्ट अकाउंट बनाकर इस बात की पुष्टि की. शुरुआत में इंस्टाग्राम के रेकमेंडेशन सिस्टम ने यौन रूप से स्पष्ट सामग्री दिखानी शुरू की और कुछ ही दिनों में उस अकाउंट पर वयस्कों से जुड़े पोर्नोग्राफिक विज्ञापन और बाद में बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले टेलीग्राम चैनलों के लिंक आने लगे.
इस जांच में ऐसे करीब 30 अनूठे विज्ञापन पाए गए जो बाल यौन शोषण से जुड़े थे. चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस सामग्री की रिपोर्ट इंस्टाग्राम से की गई, तो प्लेटफॉर्म ने शुरुआत में इसे हटाने से इनकार कर दिया और जवाब दिया कि यह उनके कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन नहीं करता.
हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर मेटा ने एक बयान जारी कर कहा कि बाल शोषण एक भयानक अपराध है और वे इसे रोकने के लिए आक्रामक रूप से काम कर रहे हैं. कंपनी ने यह भी माना कि कोई भी सिस्टम पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता, इसलिए कुछ उल्लंघन पकड़ में आने से बच जाते हैं.
वहीं, टेलीग्राम ने बताया कि उसने साल 2026 में बाल यौन शोषण से जुड़े 2,74,000 से अधिक ग्रुप और चैनलों को हटाया है.
इस पूरे मामले पर देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मदन लोकुर ने गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म इस तरह के विज्ञापनों से मुनाफा कमाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते, क्योंकि यह सीधे तौर पर "आपराधिक गतिविधि" के दायरे में आता है.
उन्होंने सुझाव दिया कि यह मामला इतना गंभीर है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए.
आंकड़ों के मुताबिक, बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्टिंग के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है; साल 2025 में भारत से लगभग 1.9 मिलियन (19 लाख) संदिग्ध मामले अमेरिकी नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन को भेजे गए थे. सरकार द्वारा मेटा को समन भेजने का यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.