शिक्षकों को नहीं सौंपी जा सकती प्रशासनिक जिम्मेदारी- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के शिक्षा विभाग को एक बड़ा झटका देते हुए साफ कर दिया है कि शिक्षण संवर्ग (टीचिंग काडर) के सदस्यों को प्रशासनिक पदों पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है. हाई कोर्ट के एकल पीठ न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु ने एक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 जून 2026 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का प्रभार एक स्कूल व्याख्याता को सौंप दिया गया था.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह कदम न केवल राज्य के सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि केंद्र सरकार के शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) की मूल भावना के भी विपरीत है.
यह मामला रवि कुमार गौतम नामक एक प्रशासनिक अधिकारी की याचिका से जुड़ा है, जिन्हें साल 2015 में सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था. छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती और पदोन्नति नियम 2026 के तहत यह पद पूरी तरह से प्रशासनिक संवर्ग का हिस्सा है.
याचिकाकर्ता जुलाई 2025 से बलौदा के प्रभारी बीईओ के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन जून 2026 में शिक्षा विभाग ने अचानक एक आदेश जारी कर यह प्रभार श्री अनिल कुमार शर्मा को सौंप दिया.
अनिल कुमार शर्मा मूल रूप से एक व्याख्याता हैं और पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत थे. इस आदेश को याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरितो दास ने दलील दी कि नियमों के अनुसार बीईओ का पद केवल प्रशासनिक अधिकारियों से ही भरा जा सकता है. उन्होंने बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 का हवाला देते हुए कहा कि कानूनन शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक प्रशासनिक कार्यों में नहीं लगाया जा सकता.
इसके विपरीत, प्रतिवादी पक्ष और राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का कामकाज संतोषजनक नहीं था, इसलिए यह बदलाव किया गया. हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया क्योंकि सरकार अदालत में याचिकाकर्ता के खराब प्रदर्शन का कोई भी दस्तावेजी सबूत या नोटिस पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही.
न्यायाधीश बिभू दत्त गुरु ने अपने फैसले में छत्तीसगढ़ के सेवा नियमों की विस्तृत व्याख्या की और कहा कि नियमों के तहत बीईओ के 75 फीसदी पद सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की पदोन्नति से और 25 फीसदी पद केवल नियमित प्राचार्यों के माध्यम से ही भरे जा सकते हैं. चूंकि प्रतिवादी शर्मा केवल एक व्याख्याता हैं और उनके पास प्राचार्य का भी केवल अतिरिक्त प्रभार है, इसलिए वे इस पद के हकदार नहीं हो सकते.
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षण और प्रशासनिक संवर्ग के बीच के अंतर को जानबूझकर बनाए रखा गया है ताकि योग्य और अनुभवी लोग ही प्रशासनिक पद संभालें. शिक्षकों को बीईओ जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर बैठाना पूरी तरह से अवैध और मनमाना है.
हाई कोर्ट ने अंत में यह दोहराया कि विशिष्ट आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षकों की सेवाएं किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य के लिए नहीं ली जा सकती हैं और इसी के साथ कोर्ट ने विवादित तबादला आदेश को निरस्त कर दिया.