गर्मी में धान की फसल पर छाया संकट
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में रवि के मौसम में धान की फसल लेने वाले किसानों की परेशानी इन दिनों बढ़ गई है. एक ओर पानी की कमी से किसान पहले से जूझ रहे थे. अब बिजली बंद होने से खेत सूखने लगे हैं.
पिछले दिनों आए आंधी-तूफान से कई हिस्सों में बिजली के पोल टूट गए हैं. जिसके चलते पिछले सप्ताह भर से अधिकांश स्थानों में बिजली बंद है.
बिजली नहीं होने के कारण किसान खेतों में सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. जबकि फसल इस समय गबोट अवस्था में है. इसी अवस्था में फसल को अधिक पानी की जरूरत पड़ती है. साथ ही खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना भी जरूरी है.
किसान लगातार बिजली विभाग से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. तीन-चार दिन यही स्थिति और रही तो पौधे सूखने लग जाएंगे.
किसानों ने बताया कि फसल को बचाने सिंचाई ही एक मात्र साधन है, लेकिन बिजली बंद होने के कारण वे मोटर पंप नहीं चला पा रहे हैं.
पानी होते हुए भी खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. जबकि रवि फसल के लिए रोज फसलों को पानी चाहिए.
वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गई है कि लगातार सप्ताह भर से फसल को पानी ही नहीं मिला है. पानी के अभाव में फसल सूखने लगी है.
बिजली दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं किसान
दुर्ग जिले के किसानों का कहना है कि बिजली विभाग की बेरुखी की चलते तैयार फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है.
किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि उनकी फसलें बच सकें और उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े.
एक किसान ने बताया कि दो एकड़ जमीन पर धान की फसल लगाई है, लेकिन बिजली बंद होने के कारण फसल को पानी नहीं मिल पा रहा है.
उनका कहना है कि कई बार बिजली विभाग के दफ्तर जाकर बिजली चालू करने गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
दो दिन पहले गिरे खंभों को गाड़ने का काम शुरू किया गया है. लेकिन काम में तेजी नहीं है. एक दिन में मात्र 4 से 5 पोल को ही दुरुस्त किया जा रहा है. जबकि कई जगहों पर ट्रांसफॉर्मर भी गिर कर खराब हो गए हैं.
बिजली विभाग के ठेकेदारों के अंडर काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि अभी तीन-चार दिन का समय और लगेगा. पोल गाड़ने के बाद तार खींचने में भी समय लगेगा.
गर्मी में धान की भूख ने बढ़ाया जलसंकट
रवि सीजन में धान की खेती करने की भूख ने भी जल स्त्रोत को खत्म करने का काम किया है. गर्मी में फसल लगाए जाने से एक तरफ बोरवेल का पानी काफी नीचे चला गया है.
दूसरी ओर इस साल गर्मी की शुरूआत से ही पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से बांधों का जल स्तर भी गिरने लगा है.
बांधों का जल स्तर पिछले तीन सालों की तुलना में सबसे निचले स्तर पर जा पहुंचा है. ऐसे में सूखे की आशंका से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं.
जबकि रवि की फसल में धान नहीं लगाने की हिदायत सरकार ने दी थी. लेकिन किसानों ने प्रशासन की बात नहीं मानी.
आलम ये है कि इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक धान की खेती हुई है.
वहीं जल संकट को लेकर प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर है. आलम यह है कि 31 जुलाई तक बोर उत्खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
चार हजार लीटर पानी में पैदा होता है एक किलो धान
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक गर्मी के मौसम में धान की खेती के लिए काफी मात्रा में पानी की जरूरत होती है.
एक किलो धान पैदा करने में लगभग चार हजार लीटर पानी की खपत होती है. जबकि अन्य फसलों में इतना पानी नहीं लगता है.
जिन इलाकों में गर्मी में धान की खेती की जा रही है, उन्हीं क्षेत्रों में भूजल संकट अधिक है. स्थिति ये है कि कई क्षेत्र जल संकट में क्रिटिकल जोन में आ चुके हैं.
ग्रीष्म कालीन धान की फसल लेने से भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है.