सुकमा बंद का दिखा व्यापक असर
सुकमा | संवाददाताः पूर्व विधायक व आदिवासी नेता मनीष कुंजाम के घर पर एसीबी व ईओडब्ल्यू के छापेमारी के विरोध में मंगलवार को सुकमा बंद का व्यापक असर रहा. समर्थन में तोंगपाल से लेकर कोंटा तक व्यापारियों ने अपनी प्रतिष्ठानें बंद रखी.
बस्तरिया राज मोर्चा की अगुवाई में सुकमा जिला बंद का आव्हान किया गया था. जिसका समर्थन कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने भी किया.
मनीष कुंजाम के समर्थक में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
राजनीतिक षड्यंत्र और बदले की कार्रवाई का आरोप लगाते हुए नेताओं ने बुधवार को कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी दी है.
कुंजाम की छवि खराब करना चाहती है भाजपा- सोढ़ी
बस्तरिया राज मोर्चा के सदस्य रामा सोढ़ी ने कहा कि पहली बार शिकायतकर्ता के घर पर ही प्रदेश की जांच एजेंसियों ने छापेमारी की है.
वन मंडल सुकमा के आला अधिकारी और तेंदूपत्ता प्रबंधकों द्वारा 6 करोड़ 54 लाख रुपये से ज्यादा के बोनस घोटाले का पर्दाफाश मनीष कुंजाम ने ही किया था.
उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. इसके बाद सुकमा के तत्कालीन डीएफओ अशोक पटेल को निलंबित किया गया था.
इसके कुछ दिन बाद ही डीएफओ के बंगले पर एसीबी और ईओडब्ल्यू ने छापे मार कार्रवाई की थी.
अब प्रदेश सरकार मनीष कुंजाम के घर छापे मरवाकर उनकी राजनीतिक छवि को खराब करना चाहती है. यह कार्रवाई पूरी तरह से प्रदेश सरकार की नौटंकी है.
विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है भाजपा- राय
कांग्रेस प्रदेश सचिव दुर्गेश राय ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है.
बिना टेंडर के पुल निर्माण को लेकर पूर्व मंत्री व कोंटा विधायक कवासी लखमा ने विधानसभा में सवाल किए थे.
इसके कुछ दिनों बाद सुकमा और राजधानी स्थित उनके घर पर ईडी की रेड पड़ी.
इससे साफ जाहिर है कि छत्तीसगढ़ सरकार सवाल करने वालों पर जबरन कार्रवाई का डर दिखाकर शांत कराना चाहती है. ऐसा ही मनीष कुंजाम के साथ भी हो रहा है.
बदले की भावना से मारा गया छापा- मनीष
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि सरकार की यह सोची समझी साजिश है. क्योंकि जिला पंचायत के चुनाव में सुकमा में भाजपा की सरकार नहीं बनी. इसका खुन्नस उन पर निकाला गया है.
मनीष कुंजाम ने यह भी आरोप लगाया कि एसीबी और ईओडब्ल्यू की छापेमारी केवल दिखावा है. छोटे-छोटे कर्मचारियों के घरों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई है,
जबकि 6 करोड़ 54 लाख रुपए का यह घोटाला है और इसमें बड़े अधिकारी भी शामिल है. लेकिन वहां छापेमारी नहीं की.
जिससे साफ जाहिर होता है कि बदले की भावना से उनके घर छापेमारी की गई.