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संगीत नाटक अकादमी सम्मान में छत्तीसगढ़ का जलवा

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11 जून 2026, 01:14 PM 6 मिनट में पढ़ें 3

संगीत नाटक अकादमी सम्मान
संगीत नाटक अकादमी सम्मान

रायपुर | संवाददाता: केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ां युवा पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान सूची में छत्तीसगढ़ के चार कलाकारों का चयन किया गया है. इनमें लोक कलाकार और रंगकर्मी पद्मश्री डॉक्टर अनूप रंजन पांडेय भी शामिल हैं, जिन्हें इस साल का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया है.


डॉक्टर अनूप रंजन पांडेय के अलावा कथक नृत्य के वरिष्ठ साधक पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप तथा युवा रंगकर्मी घनश्याम साहू और डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय को उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ां युवा पुरस्कार के लिए चुना गया है. विशेष बात यह है कि पहली बार इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के नाट्य विभाग के दो पूर्व विद्यार्थियों को एक साथ बिस्मिल्लाह ख़ां युवा राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है. यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के रंगमंचीय जगत के लिए गर्व की बात है.

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कथक के कोहिनूर पंडित रामलाल बरेठ को अकादमी फेलोशिप

संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए चयनित पंडित रामलाल बरेठ भारतीय कथक परंपरा के उन विरल कलाकारों में हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन नृत्य साधना को समर्पित किया. 6 मार्च 1936 को जन्मे रामलाल बरेठ संगीत परिवार से आते हैं. उन्होंने मात्र पांच वर्ष की आयु में अपने पिता के सानिध्य में कथक की शिक्षा प्रारंभ कर दी थी.


दस वर्ष की उम्र में ही वे रायगढ़ दरबार में प्रस्तुति देने लगे थे. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर रायगढ़ के महाराजा चक्रधर सिंह ने उन्हें जयपुर घराने के प्रसिद्ध गुरु पंडित जयलाल महाराज से प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की. महाराजा चक्रधर सिंह स्वयं संगीत, नृत्य और वादन के विद्वान थे तथा रामलाल बरेठ को अपने दरबार के नर्तकों में ‘कोहिनूर हीरा’ मानते थे.


कथक के अलावा पंडित रामलाल तबला वादन और गायन में भी पारंगत हैं. तबला की शिक्षा उन्होंने अपने पिता पंडित कार्तिकराम और पंडित जयलाल महाराज से प्राप्त की, जबकि गायन की शिक्षा अपने पिता तथा उस्ताद हाजी मोहम्मद ख़ां बांदावाले से ली. वर्ष 1949 में लखनऊ सम्मेलन में पहली बार राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति देने के बाद उनकी ख्याति देशभर में फैलने लगी. भारतीय शास्त्रीय नृत्य में अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2024 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.


लोक संस्कृति के सशक्त वाहक अनूप रंजन पांडेय को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

वरिष्ठ रंगकर्मी, लोककलाकार और बस्तर बैंड के संस्थापक अनूप रंजन पांडेय को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा हुई है. लोक नृत्य और लोक संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता रहा है.


21 जुलाई 1965 को बिलासपुर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे अनूप रंजन पांडेय को कला और संस्कृति की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली. उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से लोक संगीत में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. वर्ष 1988 में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर से हुई और वर्ष 1990 में वे ‘नया थियेटर’ से जुड़े. इसके बाद उन्होंने देश और विदेश के अनेक मंचों पर छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को नई पहचान दिलाई.


अनूप रंजन पांडेय ने 143 लोकगीतों और लोककथाओं की पांडुलिपियों का संकलन किया है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के दुर्लभ पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किया तथा अपने संग्रह के कई दुर्लभ वाद्ययंत्र रायपुर संग्रहालय को दान किए. जनजातीय कलाकारों के सहयोग से उन्होंने 60 दुर्लभ वाद्ययंत्रों से सुसज्जित ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की, जो ‘बंदूक की बजाय ढोल चुनें’ जैसे सकारात्मक संदेश के साथ बस्तर में शांति और संस्कृति के संरक्षण का अभियान चला रहा है.


लोककला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान सहित अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं. वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था. अब संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार उनके सांस्कृतिक अवदान की एक और बड़ी राष्ट्रीय मान्यता बनकर सामने आया है.


युवा नाटककार घनश्याम साहू को बिस्मिल्लाह ख़ां युवा पुरस्कार

नाटक लेखन, निर्देशन और सांस्कृतिक नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी घनश्याम साहू को वर्ष 2025 का उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ां युवा पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. उनका चयन नाटक लेखन (प्ले राइटिंग) के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए किया गया है.


इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के नाट्य विभाग से स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के बाद घनश्याम साहू ने रंगमंच को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. उन्होंने अपने लेखन और निर्देशन के माध्यम से लोकजीवन, सामाजिक सरोकारों और समकालीन विषयों को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया.


उनके प्रमुख नाटकों में ‘अघनिया’, ‘चैती’, ‘लाल दुपट्टा’, ‘बाबागिरी’, ‘पहटिया’ और ‘बिरसा’ शामिल हैं. इनमें ‘पहटिया’ का मंचन दिल्ली, बेंगलुरु, भोपाल, नागपुर, बालाघाट और चंडीगढ़ जैसे शहरों में हुआ, जिससे उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली. हाल ही में उनके लिखे नाटक ‘बिरसा’ का मंचन भारत रंग महोत्सव, रायपुर में हुआ.


रंगमंच के साथ-साथ उन्होंने सिनेमा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है. उनके द्वारा लिखित एवं निर्देशित फिल्मों में ‘कुरुक्षेत्र’, ‘झन जाबे परदेस’, ‘दंतेला’, ‘मुरली’ और ‘असुर’ प्रमुख हैं. यह पुरस्कार उनके सृजनात्मक योगदान और रंगमंच के प्रति समर्पण का राष्ट्रीय सम्मान है.


अभिनय के क्षेत्र में डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय को बिस्मिल्लाह ख़ां युवा पुरस्कार

अभिनय के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय को वर्ष 2025 का उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ां युवा पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. यह सम्मान जशपुर, छत्तीसगढ़ और पूरे हिंदी रंगमंच जगत के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है.


डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय ने वर्ष 2010 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के नाट्य विभाग से एम.ए. नाट्यकला की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने डॉ. योगेन्द्र चौबे के निर्देशन में शोध कार्य कर पीएचडी की उपाधि हासिल की. वर्ष 2007 से वे हिंदी रंगमंच के संवर्धन और विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं.


अभिनय, निर्देशन और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ी को रंगमंच से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है. वर्तमान में वे जशपुर में रंगमंचीय गतिविधियों को नई दिशा देने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाने में जुटे हैं. उनके नेतृत्व में जशपुर में रंगकर्म को नई पहचान मिली है.


पिछले दो वर्षों से वे सफलतापूर्वक ‘जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव’ का आयोजन कर रहे हैं, जो कलाकारों और रंगकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. उनका यह सम्मान उनके व्यक्तिगत संघर्ष, रचनात्मकता और रंगमंच के प्रति समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP