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धान नीलामी को लेकर गरमाई राजनीति

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Hupendra Sharma

02 मई 2025, 01:56 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

धान नीलामी
धान नीलामी

रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के बाद अब धान नीलामी के मूल्य को लेकर राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है. वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप को हास्यास्पद बताया है. 


दरअसल, राज्य सरकार ने इस बार 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की है. लेकिन अब बचे हुए धान की नीलामी में बाजार मूल्य से भी कम भाव मिल रहा है.


अभी तक मात्र 2000 रुपए तक की बोली आ रही है. इस आधार पर सरकार को प्रति क्विंटल करीब 1000 रुपए का घाटा उठाना पड़ सकता है.


धान नीलामी को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा है कि प्रदेश में कहने भर को ट्रिपल इंजन की सरकार है.


असल में छत्तीसगढ़ सरकार की दिल्ली में कुछ नहीं चलती. अगर केंद्र सरकार पूरा धान का चावल उठाती तो नीलामी नहीं करनी पड़ती और प्रदेश को नुकसान नहीं होता.


इधर कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है. किसान मोर्चा के प्रभारी और पार्टी प्रवक्ता संदीप शर्मा ने कहा कि कांग्रेस शासन में घोटाला करने के लिए हाथियों को किसानों की मेहनत का धान खिलाया गया था.


अब वही कांग्रेस बीजेपी सरकार की खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, जो हास्यास्पद है.


वहीं डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों का एक-एक दाना खरीदा है. प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा है.


इससे किसानों की जिंदगी में अलग ही खुशहाली आई है. जरूरत के बाद जो धान बचता है, उसकी नीलामी की जा रही है.


उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसानों की चिंता कभी नहीं रही. उनके कार्यकाल में किसानों के साथ सिर्फ अत्याचार हुआ.


जबकि आज छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जा रहा है.


एक क्विंटल में एक हजार का घाटा

राज्य सरकार ने इस बार धान की बंपर खरीदी की है. जबकि केंद्र सरकार ने चावल का कोटा नहीं बढ़ाया.


इसलिए धान का अतिरिक्त स्टॉक बचा हुआ है. जिस वजह से बचे अतिरक्त धान की सरकार को नीलामी करनी पड़ रही है.


लेकिन नीलामी में अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं. अभी तक तो धान की बोली बाजार मूल्य से भी कम लग रही है.


ऐसे में सरकार को एक क्विंटल पर करीब 1000 रुपए तक का नुकसान हो सकता है.


राइस मिलर्स का कहना है कि मंडी के मौजूदा भाव के हिसाब से ही बोली लगा रहे हैं. वहीं ऑनलाइन नीलामी में धान की क्वालिटी का भी पता नहीं होता है.


दूसरी ओर धान की नमी भी खत्म होने लगी है. जिससे मिलिंग के दौरान चावल टूटने की संभावना बढ़ जाती है. इन सभी वजह से बोली कम लगाई जा रही है. 


1900 से नीचे बोली आई तो फिर से टेंडर

राज्य सरकार ने धान नीलामी के लिए बेस रेट 1900 से 2100 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है.


लेकिन जिलों को अभी तक इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. मुख्यालय से आदेश आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी.


अगर बोली 1900 से नीचे आती है, तो फिर से टेंडर निकाला जाएगा या मार्कफेड मुख्यालय के आदेश से फैसला लिया जाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP