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नरेगा मजदूरीः 15 दिनों में मिलनी थी, 7 साल बाद भी नहीं मिली

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Hupendra Sharma

12 जून 2025, 10:58 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

नरेगा मजदूरी
नरेगा मजदूरी

महासमुंद | संवाददाताः राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी नरेगा में काम करने वाले मजदूरों को नियमानुसार 15 दिनों में मजदूरी भुगतान करना होता है. लेकिन इस दावे को ठेंगा दिखाते हुए महासमुंद जिले में 7 साल से मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है.


पीड़ित 60 ग्रामीण मजदूरी भुगतान के लिए सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. 

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ग्राम पंचायत नवागांव के आश्रित ग्राम झिलमिला में नरेगा के तहत साल 2018-19 में तालाब गहरीकरण का कार्य करवाया गया था. जिसमें झिलमिला गांव के करीब 60 ग्रामीणों ने मजदूरी की थी.


इसके लिए 9 लाख 76 हजार रुपए का भुगतान होना था. लेकिन यहां काम करने वाले मजदूरों का आरोप है कि उन्हें अब तक मजदूरी नहीं मिली है. जबकि रोजगार सहायक का कहना है कि राशि का भुगतान हो चुका है. 


इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक का कहना है कि ग्रामीणों से इस मामले में शिकायत मिली है. इसकी जांच कराई जाएगी. जांच सही पाए जाने पर गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.


पीड़ित मजदूरों का कहना है कि नरेगा के तहत तालाब गहरीकरण में 3 से 6 सप्ताह तक काम किया था. उस समय 210 रुपए प्रति दिवस के हिसाब से मजदूरी दी जाती थी. प्रति दिन सभी मजदूरों को मिलाकर 12 हजार 600 रुपये का काम होता था.


इस हिसाब से एक-एक मजदूर की मजदूरी 4410 रुपए से लेकर 8820 रुपए बाकी है. 


ग्रामीणों का आरोप है कि मजदूरी की मांग को लेकर जब रोजगार सहायक से चर्चा करते हैं तो जवाब मिलता है कि राशि खाते में भेजी जा चुकी है. वहीं, ग्रामीण जब बैंक जाकर पता करते हैं तो बैंक वाले कहते हैं, राशि का भुगतान नहीं किया गया है.


मजदूरों ने पास बुक प्रिंट करवा के भी देख लिया है. उसमें कहीं भी राशि का उल्लेख नहीं है.


पिछले सात साल से पीड़ित मजदूर मजदूरी नहीं मिलने से परेशान हैं. इस दफ्तर से उस दफ्तर का चक्कर लगाते हुए थक गए हैं. फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है. हताश मजदूर आखिरी उम्मीद लेकर कलेक्टर के पास मजदूरी दिलाने की मांग करने पहुंचे थे. मजदूरों ने आवेदन सौंप कर शीघ्र मजदूरी भुगतान करवाने की मांग की है. 


मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया है कि रोजगार सहायक बिना पैसे लिए जॉब कार्ड भी नहीं बनाता है. एक-एक मजदूर से 200-200 रुपए लिए हैं, तब उनका जॉब कार्ड बना है. रोजगार सहायक ने जॉब कार्ड में उनकी उपस्थिति ही नहीं दर्शाई है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP