कवासी लखमा 25 अप्रैल तक जेल में रहेंगे
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की मुश्किलें कम नहीं हो रही है. कोर्ट ने एक बार फिर उनकी रिमांड अवधि बढ़ा दी है. अब कवासी लखमा 25 अप्रैल तक जेल में रहेंगे.
शुक्रवार को 5 दिन की रिमांड अवधी खत्म होने पर कवासी लखमा को ईओडब्ल्यू ने स्पेशल कोर्ट में पेश किया.
मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया. इससे पहले कवासी लखमा दो बार ईओडब्ल्यू के रिमांड में थे.
7 अप्रैल को ईओडब्ल्यू ने प्रोडक्शन वारंट पर लेने के लिए ईओडब्ल्यू ने आवेदन लगाया था. जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 4 दिनों के लिए रिमांड बढ़ा दी थी.
इस दौरान अधिकारियों ने लखमा से 4 दिनों तक पूछताछ की.
इससे पहले 2 अप्रैल को सुनवाई हुई थी. तब ईओडब्ल्यू की मांग पर कोर्ट ने कवासी लखमा को 7 अप्रैल तक कस्टोडियल रिमांड पर सौंपा था. अब एक बार फिर रिमांड बढ़ा दी गई है.
कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में बंद है. कवासी लखमा पर आरोप है कि वह शराब घोटाले में सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे.
उन्हीं के निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था. इनसे अलावा शराब नीति बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
ईडी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया.
आरोप है कि शराब घोटाले में कमीशन के तौर पर लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे.
ईडी का कहना है कि 3 साल तक शराब घोटाला चला. तीन साल के 36 महीने में लखमा को कुल 72 करोड़ रुपए मिले.
कमीशन का पैसा लखमा को बस के द्वारा भेजा जाता था. शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है.
इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने आबकारी विभाग के पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी एपी त्रिपाठी, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया था.
इनके अलावा नकली होलोग्राम बनाने वाली नोएडा की प्रिज्म कंपनी के मैनेजर दिलीप पांडे, कर्मचारी अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह और दीपक दुआरी को भी गिरफ्तार किया था.
इनमें से तीन लोगों को पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी. जिसमें एपी त्रिपाठी, अनुराग द्विवेदी और दीपक द्वारी शामिल हैं.
जबकि इस मामले के अन्य आरोपी पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा और अनवर ढेबर को कोई राहत नहीं मिली है.