चना में फलछेदक तो सरसों-मटर में मैनी का प्रकोप
छत्तीसगढ़ में चना में फलछेदक तो सरसों-मटर में मैनी का प्रकोप
धमतरी | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में दिन और रात के तापमान में वृद्धि होने से रबी सीजन की प्रमुख फसलों पर असर पड़ना शुरू हो गया है.
यह मौसम कीट-पतंगों के लिए उपयुक्त वातावरण बना रहा है. जिसके चलते फसलों पर कीटों ने आक्रमण शुरू कर दिया है.
चना की फसल में फलछेदक तो सरसों और मटर की फसलों में मैनी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है.
वहीं धान की फसल में तनाछेदक का प्रकोप बढ़ रहा है. जिससे किसान चिन्तित हैं.
तापमान बढ़ने के साथ ही कीटों का प्रकोप भी बढ़ता है. खासकर चना की फसल में इल्ली (कैटरपिलर) का असर अधिक देखने को मिल रहा है.
चने की फसल में अब फल आना शुरू हो गया है. अभी तक मौसम अनुकूल होने से पिछले साल की तुलना में चने की फसल अच्छी है.
फल भी बड़े आकार का लगा है. जिसे देखकर किसान इस बार बंपर उत्पादन लेने की सोच रहे थे.
लेकिन मौसम के बदलते ही फसलों पर कीटों ने हमला शुरू कर दिया है.
चना में फलछेदक कीटों का प्रकोप बहुतायत मात्रा में है, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है.
अब फसल को बचाने किसानों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है. किसान लगातार दवाई का छिड़काव कर रहे हैं.
लेकिन सर्द-गर्म मौसम होने के कारण कीटनाशक दवा भी ज्यादा दिनों तक कीटों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है.
27 हेक्टेयर क्षेत्र में चने की फसल
कृषि विभाग के मुताबिक इस साल धमतरी जिले में चना, गेंहू, धान, मक्का, रागी और जौ को मिलाकर कुल 22 हजार ऐक्टेयर क्षेत्र में अनाज लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
जिसमें से 26.969 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने चना और सरसों की फसल लगाया है.
चने की फसल में अब फल लगना शुरू हो गया है. वहीं अभी तक लगभग 97 प्रतिशत किसानों ने धान की फसल लगा लिया है.
कृषि विभाग के मुताबिक मौसम अनुकूल रहा तो चना की फसल की कटाई मार्च तक पूरी हो जाएगी.
वहीं, कुछ टॉलरेंट वैरायटी भी उपलब्ध हैं, जो कीटों के प्रकोप को झेलने में सक्षम है.
फसलों की नियमित निगरानी जरूरी
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है फसलों की नियमित निगरानी करते रहें.
जरूरत के हिसाब से ही जैविक या रासायनिक उपायों का इस्तेमाल करें. ताकि फसल का उत्पादन और गुणवत्ता बनी रहे.
साथ ही बताया कि यदि एक वर्ग मीटर में इल्ली की संख्या 3-4 है तो वह शुरुआती लक्षण है.
रासायनिक कीटनाशकों की बजाय जैविक कीटनियंत्रकों का उपयोग करना अधिक फायदेमंद है.
स्प्रे करके शुरुआती इल्लियों को नियंत्रित किया जा सकता है.
यदि एक मीटर में इल्ली की संख्या 10-15 से अधिक है, तो रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी है.