खेती हुई महंगी, बीज के दाम बढ़े
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में किसानों को इस बार खेती करना महंगा पड़ेगा. राज्य बीज निगम ने बीजों के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है. पिछले दो सालों की तुलना में बीज के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. 2023 की तुलना में बीजों की कीमत में लगभग 850 रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है.
धान के बीज में प्रति क्विंटल 100 से 150 रुपए तक की वृद्धि की गई है. इससे किसानों को झटका लगा है. किसानों का कहना है कि इस साल आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ेगा.
राज्य बीज निगम की ओर से हर साल प्रमाणित बीजों का मूल्य निर्धारण किया जाता है.
मोटा धान बीज की कीमत विगत साल 34 सौ रुपए क्विंटल थी, जिसे बढ़ाकर इस बार 3550 रुपए कर दिया गया है. जबकि वर्ष 2023 में इसका दाम 2688 रुपये था. यानी 2023 की तुलना में किसानों को 862 रुपये अधिक देना होगा.
वहीं पतला धान बीज की कीमत पिछले साल 3900 रुपए थी. जिसे बढ़ाकर इस साल 4030 रुपये कर दिया गया है. दो साल पहले इसकी कीमत 2882 रुपए तक थी.
सुगंधित धान की बात करें तो पिछले साल यह 4500 रुपए था, जो इस बार बढ़कर 4650 हो गया है. दो साल पहले यह 3264 तक सीमित था.
कोदो में 100 रुपये की वृद्धि
यही हाल दाल समेत दूसरे बीजों का भी है. दाल के बीजों की कीमतों में भी वृद्धि की गई है.
सोयाबीन और उड़द को छोड़कर कोदो, रागी, मूंग, कुल्थी, मूंगफली और तिल के बीजों के दाम सौ से डेढ़ सौ रुपए प्रति क्विंटल तक महंगे हो गए हैं. इसी तरह कोदो के बीज की कीमत पहले 7200 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर 7300 रुपए कर दिया गया है.
यही हाल मूंग का भी है. मूंग की कीमत 11200 से बढ़ाकर 11400 और कुल्थी की कीमत 7600 से बढ़ाकर 7750 हो गई है.
सोयाबीन बीज हुआ सस्ता
इस बार किसानों को सोयाबीन बीज में राहत मिली है. पिछले दो वर्षों में सोयाबीन के दाम 8200 रुपए तक चले गए थे.
इस बार इसकी कीमत को कम कर 7400 रुपए कर दिया गया है. सोयाबीन के दाम में 1200 रुपए की कमी हुई है.
इसी तरह खाद में भी राहत दी गई है. किसानों की सबसे अधिक आवश्यकता वाली खाद डीएपी और यूरिया के भाव नहीं बढ़ाए गए हैं.
डीएपी 50 किलोग्राम का दाम पिछले साल की तरह ही 1350 रुपए ही है. यूरिया भी विगत वर्ष की तरह ही 266 रुपए पर है.
जबकि पोटाश की कीमत में मामूली कमी की गई है. पहले पोटाश 1650 रुपए में मिल रहा था, अब उसे 1555 रुपए में किसान खरीद सकते हैं.
बताया गया कि खाद और बीजों का भंडारण सोसाइटियों में शुरू हो गया है.
मूल्य घोषित नहीं होने से भटक रहे थे किसान
खरीफ फसल के लिए बीज निगम द्वारा बीज की नई दर तय नहीं होने से किसान भटक रहे थे. जबकि 1 अप्रैल से खरीफ सीजन प्रारंभ हो गया है.
नियम के अनुसार तो सीजन प्रारंभ होने से पहले ही मूल्य तय हो जाना था. नई दर सूची जारी नहीं होने से किसान बीज का उठाव नहीं कर पा रहे थे.
किसान बीज और खाद खरीदने लगातार सोसाइटियों के चक्कर ला रहे थे. इसके चलते किसानों के साथ ही समितियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी.
जबकि खरीफ सीजन के लिए सहकारी समितियों में बीज का भंडारण शुरू हो गया था. लेकिन समितियों में नई मूल्य सूची नहीं पहुंचने की वजह से समिति प्रबंधक बीजों का वितरण शुरू नहीं कर पा रहे थे. प्रबंधक मूल्य सूची के इंतजार में बैठे हुए थे.