बस्तर में पानी के लिए किसानों ने किया चक्काजाम
छत्तीसगढ़ बस्तर में पानी के लिए किसानों ने किया चक्काजाम
जगदलपुर | संवाददातः छत्तीसगढ़ के बस्तर में किसान अपनी फसल बचाने के लिए पानी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
इंद्रावती नदी के लगातार घटते जलस्तर को लेकर किसानों ने सोमवार को नेशनल हाईवे- 30 पर भोंड़ के पास चक्काजाम कर दिया.
इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस चक्काजाम में सैकड़ों की संख्या में किसान शामिल हुए.
बस्तर के किसानों ने कुछ दिन पहले ही बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इंद्रावती नदी में बने स्टाप डेम का पानी छोड़ने मांग की थी.
सप्ताह भर बाद भी मांग पूरी नहीं होने पर सोमवार को आक्रोशित किसानों ने नेशनल हाइवे पर चक्काजाम कर दिया.
इससे हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. जगदलपुर-रायपुर मार्ग में जाम की स्थिति बन गई.
चक्काजाम की सूचना मिलने ही पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंची.
पुलिस किसानों को समझाने की कोशिश की लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे.
किसानों का कहना है कि जब तक स्टाप डैम से पानी नहीं छोड़ा जाता आंदोलन से नहीं हटेंगे.
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
किसान लखेश्वर कश्यप और कृपाल कश्यप सहित अन्य किसानों का कहना है कि इंद्रावती बस्तरवासियों की प्राणदायनी नदी है.
इसी नदी के भरोसे बस्तर जिले के सैकड़ों किसान खेती करते हैं. लेकिन नदी में पानी नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है.
हरी सब्जियों के साथ धान और मक्के की फसल पूरी तरह से सूख कर बर्बाद हो रही है.
किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद भी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है.
किसानों के पास सिंचाई के लिए और कोई साधन नहीं है. जोरा नाला की समस्या पिछले कई सालों से बनी हुई है.
अब तक इसका समाधान नहीं निकाला गया है. किसानों का आरोप है कि अनुबंध के अनुसार ओडिशा सरकार बस्तर को 50 फीसदी पानी भी नहीं दे रही है.
जिस वजह से इसका सबसे ज्यादा नुकसान बस्तर के किसानों को उठाना पड़ रहा है.
आंदोलन उग्र करने की चेतावनी
किसानों का कहना है कि इंद्रावती नदी तट से लगे इलाकों में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है.
किसानों की मांग है कि इंद्रावती नदी में बने स्टॉप डैम से 10-10 फीसदी पानी छोड़ा जाए जिससे कि किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर पाए.
अगर पानी की समस्या का समाधान नहीं होता है तो किसानों को नुकसान होने वाली फसलों की क्षतिपूर्ति राशि दी जाए.
अगर यह मांगे जल्द पूरी नहीं होती है तो बस्तर के किसान अपने आंदोलन को उग्र करने के साथ ही अनिश्चितकाल आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
डैम से छोड़ेगा 5 प्रतिशत पानी
आंदोलन की सूचना मिलते ही बस्तर एसडीएम ए.आर राणा मौके पर पहुंचे.
एसडीएम ने बताया कि वर्तमान में जोरा नाला से बस्तर की तरफ केवल 17 फीसदी पानी छोड़ा जा रहा है.
हालांकि किसानों की मांग पर जल संसाधन विभाग वर्तमान में 3 से 4 फीसदी पानी स्टाप डैम से किसानों के लिए छोड़ रहा है.
किसानों के आंदोलन को देखते हुए अब जल संसाधन विभाग ने 5 फीसदी पानी छोड़ने का निर्णय लिया है.
हालांकि यह किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है. वैकल्पिक व्यवस्था करने की जिला प्रशासन कोशिश कर रहा है.
सूखी नदी में क्रिकेट खेल रहे बच्चे
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है.
इस साल आलम यह है की सूखती नदी में बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं. साथ ही रेत माफिया भी सक्रिय हो गए हैं.
नदी में लगातार रेत का अवैध उत्खनन भी किया जा रहा है.
कुछ दिन पहले ही किसानों ने इस सूखी नदी में पैदल मार्च कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था.
लेकिन अब तक सरकार सूखती इंद्रावती को लेकर चिंतित दिखाई नहीं दे रही है.