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महाकुंभ में मल-जल स्नान- शंकराचार्य

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19 फ़र. 2025, 02:07 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

महाकुंभ में मल-जल स्नान
महाकुंभ में मल-जल स्नान

रायपुर | संवाददाताः जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने उत्तरप्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महाकुंभ 144 साल बाद हो रहा है, दोबारा ऐसा मौका नहीं मिलेगा, यह सभी दावे झूठे थे. 


महाकुंभ में स्नान वाले पानी में गंदे नालों का पानी आ रहा है. उसमें मल-जल धारा आ रही है. 


वैज्ञानिक इसे स्नान के लिए योग्य नहीं मान रहे हैं. उसी में करोड़ों लोगों को स्नान के लिए मजबूर कर रहे हैं. 


यह जो भी हो रहा है, वह जनता के साथ अन्याय है.


ये बातें ज्योतिर्मठ पीठ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में कही है. 


वह बेमेतरा जिले के सलधा पहुंचे हैं. यहां वह सपाद लक्षेश्वर धाम में आयोजित कथा में शामिल हुए. इस दौरान शंकराचार्य ने पत्रकारों से चर्चा की.


शंकराचार्य महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार झूठे प्रचार में लगी हुई है. 


144 साल की बात ही झूठी है. सरकार ने लोगों को सुविधा देने की बजाय भ्रम फैलाया.


उन्होंने कहा कि सरकार को 12 साल पहले ही पता था कि कुंभ मेला फिर से आएगा, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई. 


अगर पहले से ही इतनी भीड़ आने की संभावना थी, तो इसके लिए सही तरीके से प्रबंधन किया जाना चाहिए था. 


उन्होंने कहा कि महाकुंभ में पुल बनाए गए, ताकि लोग आवाजाही कर सकें, लेकिन पुल बंद कर दिए गए. 


300 किलोमीटर का जाम लगा रहा. लोग अपने सामान के साथ 20-25 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हैं.


शंकराचार्य ने कहा कि लोग अपनी श्रद्धा से नहा रहे हैं, यह अलग बात है.


लेकिन आपका तो काम था कि नालों को थोड़े दिन के लिए रोक देते या तो डायवर्ट कर देते. 


इसका मतलब है कि महाकुंभ में कुप्रबंध है. 


उन्होंने आगे कहा कि पूरे महाकुंभ के दौरान कोई भी वैकल्पिक तैयारी नहीं गई. 


जो व्यवस्थाएं की जानी चाहिए थी उनमें से कुछ नहीं हुआ, न क्राउड मैनेजमेंट का पालन किया न ही सुरक्षा का ख्याल रखा गया.


भगदड़ में हुई मौतों का आंकड़ा छुपाया गया है, यह घोर पाप है.
 

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP