शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़: कांकेर में शव दफन को लेकर तनाव जारी

छत्तीसगढ़: कांकेर में शव दफन को लेकर हुआ बवाल

C

CG Khabar

19 दिस. 2025, 08:37 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

कांकेर में दंगा
कांकेर में दंगा

कांकेर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आमाबेड़ा के बड़े तेवड़ा गांव में धर्मान्तरित व्यक्ति के दफनाये गए शव को लेकर बीते 4 दिनों से बवाल मचा हुआ है. गुरुवार को हजारों की संख्या में आदिवासी समाज और हिन्दू संगठन के लोग लाठी-डंडों के साथ आमाबेड़ा बाजार स्थल में इकट्ठा हुए. ये लोग दफनाए शव को बाहर निकालने की मांग करने लगे. जिसके बाद धर्मांतरित परिवार के लोग और हिन्दू संगठन के लोग व मूल आदिवासियों के बीच जमकर बवाल हुआ. 


देखते ही देखते ये बवाल हिंसक रूप में बदल गया. दोनों ओर से जमकर लाठी चली और पत्थर बाजी भी हुई. इस पत्थरबाजी में एडिशनल एसपी के साथ ही 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी और कुछ पत्रकार भी घायल हुए. 


धर्मांतरित समुदाय के लोगों के द्वारा पहले पत्थरबाजी किये जाने का आरोप लगाकर हिंदू संगठन के लोग हजारों की संख्या में गुस्साए मूल आदिवासी समाज के लोगों ने गांव में मौजूद चर्च में जमकर तोड़फोड़ की और आगजनी की वारदात को अंजाम दिया. इधर तनाव की स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है. 


साथ ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग क्षेत्र में रखा है और गांव को पूरी तरह से सील कर दिया है. साथ ही बाहरी व्यक्तियों का गांव में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है पुलिस पूरे इलाके को घेराबंदी कर रखी है. पुलिस ने आमाबेड़ा, बड़े तेवड़ा, नरहरपुर ,सुरही, दुधावा, चारमा, भानुप्रतापपुर, कांकेर ,कोंडागांव, धमतरी सिहावा और नगरी क्षेत्र में भी इस घटना के बाद अलर्ट जारी किया है.


दरअसल धर्मान्तरण कर चुके बड़े तेवड़ा गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमराराम सलाम उर्म 70 वर्ष की रविवार (16 दिसंबर )को स्वास्थ्य खराब होने के कारण मौत हो गई थी. सरपंच रजमन सलाम ने बिना गांव को सूचना दिए पिता के शव को ईसाई रीतिरिवाज से गांव में ही अपने निजी जमीन पर दफन कर दिया.


गांव वाले सोमवार से इसका विरोध करने लगे कि चोरी-छुपे सरपंच ने अपने पिता के शव का दफन किया है. मंगलवार को आस-पास के ग्रामीण बड़े तेवड़ा पहुंचे और शव को बाहर निकालने की मांग करने लगे और शव दफन का विरोध करने लगे. बुधवार को पूरे मामले ने हिंसक रूप ले लिया ईसाई समुदाय और मूल आदिवासी समाज के बीच मारपीट तक पहुंच गई जिसमें कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए.


स्थानीय आदिवासी ग्रामीण दफन किये गए शव को बाहर निकालने की कोशिश करते रहे. वहीं ईसाई समुदाय के लोग भी शव नही निकालने की बात को लेकर अड़े रहे. इस बीच प्रशासन लगातार ग्रामीणों को समझाने की कोशिश करता रहा.


गुरुवार को गुस्साए हजारों ग्रामीण इकट्ठा होकर शव बाहर निकालने की मांग करते रहे और नही निकाले जाने पर खुद निकालने की बात कहते रहे. इसके बाद गुस्साए हजारों ग्रामीणों ने गांव में मौजूद चर्च में जमकर तोड़फोड़ की और उसके बाद चर्च में आग लगा दिया साथ ही सरपंच के घर मे भी तोड़फोड़ की.


इसके बाद ये भीड़ आमबेड़ा गांव भी पहुंची और यहां भी चर्च में जमकर तोड़फोड़ की. बड़ेतेवड़ा के साथ साथ आमाबेड़ा गांव में भी में तनाव की स्थिति बन गई. दोनों गुटों में जमकर मारपीट भी हुई लाठी भी चले और इस झड़प में दोनों तरफ से कई लोग बुरी तरह से घायल हुए. 


मौके पर तैनात एडिशनल एसपी आशीष बंछोड़ समेत 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी और कुछ पत्रकार भी घायल हो गए हैं.


ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा विधिक प्रावधानों के अनुसार गुरुवार शाम को स्वास्थ विभाग की टीम की मौजूदगी में शव को बाहर निकाला गया और रायपुर ले जाया गया है. शुक्रवार को पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने की बात अधिकारियों ने कही है. उसके बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी.


अधिकारी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. ग्रामीण आपस में आमने-सामने आ गए और पत्थरबाजी की घटना हुई. पुलिस कर्मियों और कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए है. घटना के दौरान संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचा है. कांकेर डीआईजी, एसपी, कलेक्टर समेत एसडीएम ,तहसीलदार भी गांव में मौजूद है और स्थिति नियंत्रण में होने की बात कह रहे हैं.


गौरतलब है की इससे पहले भी कांकेर जिले में धर्म परिवर्तन की घटनाओं के बाद 14 गांव में पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर बैन लगा दिया गया है. ग्रामीणों के मुताबिक यह कदम उन्होंने अपनी परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए उठाया है. इन 14 गांव में से जामगांव गांव है जिसकी जनसंख्या करीब 6 से 7 हजार है यहां 14 से 15 परिवारों ने अघोषित रूप से ईसाई धर्म अपना लिया है. इसी वजह से आदिवासी समुदाय और धर्म परिवर्तन कर चुके परिवारों के बीच दूरी बढ़ती गई है. 


वहीं ईसाई समुदाय के लोगों का कहना है कि उनके रिश्तेदार भी अब मिलने नहीं आ पा रहे है क्योंकि जिन गांवों में वह रहते हैं वहां भी इसी तरह के बोर्ड लगा दिए गए हैं. एक तरफ जहां सरकार मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद मुक्त करने का दावा कर रही है लेकिन वहीं दूसरी तरफ बस्तर में पिछले कुछ सालों से धर्मांतरण का मुद्दा इतना गरमाया हुआ है कि अब मूल आदिवासी समाज और धर्मांतरित लोगों के बीच लगातार हिंसक झड़प हो रही है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP