सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: कानून की समझ बिना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बदला हत्या का फैसला
नई दिल्ली । डेस्क: बुधवार 14 अक्टूबर' 2026 के बार एंड बेंच की खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के काम करने के तरीके और न्यायिक समझ पर तीखी टिप्पणी करते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की है. शीर्ष अदालत ने एक हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अगर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को आपराधिक कानून के बुनियादी सिद्धांतों की ही जानकारी नहीं होगी, तो उनसे साक्ष्यों और सबूतों के सही मूल्यांकन की उम्मीद कैसे की जा सकती है.
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट ने हत्या के एक आरोपी की सजा को घटा दिया था.
निचली अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. हालांकि, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रजनी दुबे की पीठ ने इस सजा को बदलकर आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II (गैर-इरादतन हत्या) के तहत 10 साल के कारावास में तब्दील कर दिया था. हाईकोर्ट का मानना था कि यह घटना अचानक हुए विवाद का परिणाम थी और आरोपी का महिला को मारने का कोई पूर्व इरादा नहीं था.
मामला फरवरी 2021 का है, जब आरोपी एक महिला के घर उसके बेटे की तलाश में पहुंचा था. आरोपी ने महिला पर घातक हमला किया, जिससे उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं. अस्पताल में दम तोड़ने से पहले महिला ने अपने पति को बताया था कि आरोपी ने ही उस पर हमला किया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हुआ कि मृत्यु का कारण सिर पर लगी गंभीर चोट थी.
इस मामले में हाईकोर्ट के रुख की आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायालय ने पूरी तरह से लापरवाही बरतते हुए और कानून की समझ के बिना फैसला सुनाया. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों, चोटों की गंभीरता और घटना की पूरी पृष्ठभूमि को नजरअंदाज कर दिया.
शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि हाईकोर्ट बार-बार इस तरह की गलतियां कर रहा है. अदालत ने टिप्पणी की कि जिन कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की गई है, वे कानून के छात्रों को लॉ कॉलेज के पहले वर्ष में ही सिखाए जाते हैं. धारा 304 के दोनों भागों के बीच के अंतर को न समझ पाना बेहद चिंताजनक और दयनीय स्थिति को दर्शाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में आरोपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अदालत ने आरोपी से जवाब मांगा है कि क्यों न हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया जाए और निचली अदालत द्वारा दी गई हत्या की सजा को बहाल कर दिया जाए.
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ सरकार से भी जवाब तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की फिर से योग्यता के आधार पर समीक्षा करेगा.