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टूट रहा पृथ्वी का ऊपरी परत, वैज्ञानिकों को भूगोल बदलने की आशंका

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15 अक्टू. 2025, 12:47 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

पृथ्वी
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नई दिल्ली । डेस्क: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की ऊपरी परत (क्रस्ट) के टूटने की एक अभूतपूर्व घटना का पता लगाया है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर प्रलय और भूगोल में बदलाव की आशंका जताई जा रही है. यह घटना ठीक वैसे ही हो रही है, जैसे पटरी से उतरने पर ट्रेन के डिब्बे एक-एक करके अलग हो जाते हैं.


यह गतिविधि महासागर की गहराइयों में दो टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर के बाद हो रही है. इस प्रक्रिया में, नीचे धंसने वाली प्लेट (आमतौर पर समुद्र के नीचे की भारी प्लेट) धीरे-धीरे टूटना शुरू हो जाती है और छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाती है. इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक 'सबडक्शन ज़ोन की मृत्यु' कह रहे हैं.

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यह घटना कनाडा के वैंकूवर द्वीप से लेकर वाशिंगटन और उत्तरी कैलिफ़ोर्निया के तट तक फैले एक संवेदनशील क्षेत्र 'कैस्केडिया सबडक्शन ज़ोन' में देखी गई है. इस क्षेत्र में, 'हुआन डी फूका' (Juan de Fuca) और 'एक्सप्लोरर' प्लेटें उत्तरी अमेरिका प्लेट के नीचे प्रवेश कर रही हैं.


वैज्ञानिक लंबे समय से इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नज़र रख रहे थे, क्योंकि उनका मानना था कि यहां कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है. हाल ही में, शोधकर्ताओं ने पाया कि 'सबडक्शन ज़ोन' के धीरे-धीरे मरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है-यानी एक प्लेट के दूसरी प्लेट के नीचे धंसने की प्रक्रिया रुक रही है.


रहस्योद्घाटन:

2021 में, वैज्ञानिकों ने 'कैस्केडिया सीस्मिक इमेजिंग एक्सपेरिमेंट' नामक एक अभियान चलाया. इस दौरान, एक जहाज़ से समुद्र के तल में ध्वनि तरंगें भेजकर टेक्टोनिक प्लेटों में गहरे दरार और टूटने की रेखाओं का पता लगाया गया. वैज्ञानिकों ने देखा कि प्लेट का कुछ हिस्सा लगभग पाँच किलोमीटर नीचे खिसक गया है, और दरार की लंबाई लगभग 75 किलोमीटर है. कुछ जगहें भूकंप के साथ सक्रिय हैं, जबकि कुछ शांत हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह शांति टूटने के कारण अलग हुए प्लेट के हिस्सों का संकेत है. पहली बार उन्हें इस प्रक्रिया का सीधा प्रमाण मिला है.


भविष्य की आशंका:

भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लेटों के टुकड़ों में टूटने से ज्वालामुखी विस्फोट हो सकते हैं, जिससे समय के साथ नई प्लेट सीमाएं बनेंगी और पृथ्वी का भूगोल बदल सकता है. हालांकि, उनका कहना है कि इस वजह से तत्काल कोई बड़ा भूकंप आने की संभावना नहीं है. फिर भी, वे इस बात से आश्वस्त हैं कि भविष्य में कैस्केडिया क्षेत्र में भूकंप ज़रूर आएगा.


यह महत्वपूर्ण शोध 'साइंस एडवांसेज' (Science Advances) जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसके मुख्य लेखक लुइज़ियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के भूविज्ञानी, ब्रैंडन शुक हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP