पूरे छत्तीसगढ़ पर नक्सली टैग नहीं लगाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने खेल किट (sports kits) की आपूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की एक टेंडर शर्त को "भेदभावपूर्ण, मनमाना और अनुचित" बताते हुए कड़ी आलोचना की है और उसे रद्द कर दिया है. न्यायालय ने पूरे राज्य को नक्सल प्रभावित घोषित कर केवल उन्हीं फर्मों को पात्र मानने के औचित्य को खारिज कर दिया, जिनके पास राज्य में पहले से आपूर्ति का अनुभव था.
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह फ़ैसला सुनाया. पीठ ने जुलाई 2025 में स्कूली छात्रों के लिए खेल किट की आपूर्ति हेतु जारी किए गए तीन सरकारी नोटिफ़िकेशन की विवादित शर्त को रद्द कर दिया. न्यायालय ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार की स्वतंत्रता) के सिद्धांतों का उल्लंघन माना.
पीठ ने स्पष्ट किया, "छत्तीसगढ़ के केवल कुछ ही ज़िले माओवादी गतिविधियों से प्रभावित हैं, और अन्य पात्र बोलीदाताओं (bidders) को बाहर करने के लिए पूरे राज्य को समान रूप से नक्सल प्रभावित मानना ग़लत है... यह अदालत पाती है कि impugned टेंडर शर्त मनमानी, अनुचित और भेदभावपूर्ण है... इसका राज्य में बच्चों को खेल किट की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोई तर्कसंगत संबंध नहीं है."
यह फ़ैसला विनिश्मा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक अपील पर आया, जिसने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने टेंडर की शर्त को सही ठहराया था. ₹39.8 करोड़ के इन टेंडरों को समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ राज्य परियोजना कार्यालय, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 33 ज़िलों के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के लिए जारी किया गया था.
विवादित शर्त
विवाद का केंद्र वह शर्त थी जिसके तहत बोलीदाताओं को पिछली तीन वित्तीय वर्षों में छत्तीसगढ़ की सरकारी एजेंसियों को कम से कम ₹6 करोड़ मूल्य के खेल सामान की आपूर्ति करने का अनुभव होना आवश्यक था. न्यायालय ने कहा कि इस शर्त ने एक "कृत्रिम बाधा" (artificial barrier) उत्पन्न की, जिससे उन सक्षम फर्मों को बाहर कर दिया गया जिन्होंने अन्य राज्यों या केंद्र सरकार की एजेंसियों के साथ सफलतापूर्वक अनुबंध पूरे किए थे.
न्यायालय ने राज्य के इस तर्क को अस्वीकार कर दिया कि स्थानीय अनुभव महत्वपूर्ण था क्योंकि छत्तीसगढ़ माओवादी प्रभावित क्षेत्र था. पीठ ने कहा कि यह तर्क 'असमर्थनीय' (untenable) है क्योंकि यह टेंडर सुरक्षा-संवेदनशील सामग्री के लिए नहीं, बल्कि केवल खेल किट के लिए था.
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक खरीद का उद्देश्य व्यापक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करके राजकोष के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली वस्तुओं और सेवाओं को प्राप्त करना है, जबकि यह शर्त बाहरी बोलीदाताओं के लिए एक बंद दरवाज़े की तरह काम कर रही थी.
पीठ ने तीन टेंडर नोटिसों को रद्द कर दिया और राज्य सरकार को संवैधानिक मानकों के अनुरूप नए सिरे से टेंडर जारी करने की अनुमति दी.