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छात्र नहीं तो मनपसंद ट्रांसफर नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

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20 जून 2026, 06:19 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की शिक्षक युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) नीति को सही ठहराते हुए एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्कूल में संबंधित विषय का एक भी छात्र नामांकित नहीं है, तो वहां पदस्थ शिक्षक उसी स्थान पर बने रहने का कानूनी अधिकार का दावा नहीं कर सकते.


यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने दो वाणिज्य व्याख्याताओं की अपील को खारिज करते हुए दिया. याचिकाकर्ता जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिवनी में पदस्थ थे, जहां विभागीय समीक्षा के दौरान वाणिज्य संकाय में एक भी छात्र नहीं पाया गया. 

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इसके बाद युक्तिकरण नीति के तहत उन्हें सरप्लस घोषित कर मुंगेली जिले के अन्य स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया गया था.


शिक्षकों ने इस ट्रांसफर को भेदभावपूर्ण और नियमों के खिलाफ बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नीति के क्लॉज 7(C)(2) के तहत काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को वहां भेजना है जहां छात्रों को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है.


हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को मजबूत मानते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों या शिक्षकों को किसी विशेष स्थान या गृह जिले में ही पदस्थ रहने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है. 


हाईकोर्ट ने दोहराया कि तबादले और स्टाफ का समायोजन पूरी तरह से प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा है और इसमें तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता जब तक कि कोई दुर्भावना या वैधानिक नियमों का स्पष्ट उल्लंघन न दिखे.  

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP