19 सरकारी नौकरियां पाने वाली चारू पांडे को राष्ट्रपति सम्मान
रायपुर । संवाददाता: "जहाँ चाह, वहाँ राह" की कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करते हुए छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के एक छोटे से कस्बे तिल्दा की रहने वाली चारू पांडे ने देश के सामने सफलता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है. चारू ने अपनी लगन, कड़ी मेहनत और अटूट अनुशासन के दम पर महज 24 साल की उम्र से पहले एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 19 सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफलता का परचम लहराया है.
देश में जहाँ करोड़ों युवा वर्षों की तैयारी के बाद एक अदद सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं चारू की इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी ने पूरे देश के प्रतियोगी परीक्षा जगत को हैरत में डाल दिया है.
उनकी इसी असाधारण अकादमिक उत्कृष्टता और ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में आगामी स्वतंत्रता दिवस 2026 के राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति स्वर्ण पदक' (प्रेसिडेंशियल गोल्ड मेडल) से सम्मानित करेंगी. यह राष्ट्रीय सम्मान देश में युवा प्रतिभाओं को मिलने वाली एक बहुत बड़ी और गौरवशाली मान्यता है.
प्रवीण कुमार पांडे और सुधा पांडे की बेटी चारू का जन्म और पालन-पोषण बिना किसी विशेष सुख-सुविधाओं और विशेषाधिकारों के एक छोटे से शहर में हुआ. लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से इस कमी को कभी आड़े नहीं आने दिया. वर्तमान में चारू चेन्नई में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कार्यालय में सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी (Assistant Audit Officer) के रूप में देश की सेवा कर रही हैं.
चारू की प्रारंभिक शिक्षा तिल्दा-नेवरा में हुई, जिसके बाद उन्होंने दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से गणित विषय में बीएससी (B.Sc.) की डिग्री हासिल की. गणित की इस पढ़ाई ने उनकी तार्किक क्षमता, तीव्र समस्या समाधान कौशल और संख्यात्मक दक्षता की एक ऐसी मजबूत नींव तैयार की, जो आगे चलकर देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने की सबसे बड़ी कुंजी बनी.
चारू की इस अद्वितीय सफलता का सबसे बड़ा रहस्य यह रहा कि उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी होने का इंतजार नहीं किया, बल्कि कॉलेज के दिनों से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी. जब उनके सहपाठी कॉलेज जीवन का आनंद ले रहे थे, तब चारू मॉक टेस्ट और पुराने प्रश्न पत्रों को हल करने में जुटी हुई थीं.
शुरुआत में उन्हें कुछ असफलताओं और बाधाओं का भी सामना करना पड़ा जो किसी को भी निराश कर सकती थीं, लेकिन चारू ने हर असफलता को अपनी ताकत बनाया. उन्होंने अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार किया और हर बार दोगुनी ताकत से वापसी की.
गणित की मजबूत पृष्ठभूमि के कारण उन्हें एसएससी, बैंकिंग और रेलवे की परीक्षाओं के मुख्य हिस्से यानी क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और रीजनिंग को हल करने में बढ़त मिली.
इसी का परिणाम रहा कि उन्होंने एसएससी सीजीएल, एसबीआई पीओ, आईबीपएस पीओ, आरआरबी एनटीपीसी, दिल्ली पुलिस, एसएससी सीएचएसएल, एमटीएस, जीडी, सीपीओ, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर, ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर और सीजी एनएचएम जैसी 19 कठिन परीक्षाओं की दीवार को ढहा दिया.
चारू पांडे की यह प्रेरक कहानी आज देश भर के उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा रोडमैप है जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि यदि सही रणनीति, पाठ्यक्रम के मुख्य विषयों पर मजबूत पकड़, निरंतर अभ्यास और समय पर सटीक रिवीजन किया जाए, तो सफलता के बड़े से बड़े पहाड़ को भी आसानी से पार किया जा सकता है.