ईरान युद्ध के बीच वैश्विक निवेशकों ने घटाया अमेरिकी कर्ज
वाशिंगटन । डेस्क: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजरायल व ईरान के बीच जारी सीधे युद्ध ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है. इस युद्ध के पहले पूरे महीने (मार्च) के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं. दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और संस्थागत निवेशकों ने अमेरिकी सरकारी कर्ज (ट्रेजरी बॉन्ड) से बड़े पैमाने पर अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.
अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में भारी गिरावट
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में विदेशी निवेशकों के पास कुल अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग घटकर 9.35 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रह गई. इससे पिछले महीने यानी फरवरी में यह आंकड़ा 9.49 ट्रिलियन डॉलर पर था. दुनिया के शीर्ष 10 विदेशी कर्जदाताओं में से सात देशों ने अमेरिकी सरकार के ऋण में अपनी हिस्सेदारी को कम किया है. निवेशकों के इस कदम से अमेरिकी बाजार में चिंताएं काफी बढ़ गई हैं.
जापान और चीन ने बेचे अरबों के बॉन्ड
अमेरिकी बॉन्ड के सबसे बड़े विदेशी धारक जापान ने मार्च में अपनी हिस्सेदारी में 47.7 बिलियन डॉलर की भारी कटौती की है, जिसके बाद उसका कुल स्टॉक घटकर 1.192 ट्रिलियन डॉलर रह गया है. वहीं, चीन ने भी अपने अमेरिकी ट्रेजरी निवेश को पिछले महीने के 693.3 बिलियन डॉलर से घटाकर 652.3 बिलियन डॉलर कर दिया है. इस भारी कटौती के बावजूद चीन तीसरे स्थान पर बरकरार है. इसके विपरीत, ब्रिटेन ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 926.9 बिलियन डॉलर कर ली है और वह दूसरे स्थान पर है.
बढ़ते आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिकवाली के पीछे कई बड़े कारण हैं. नए फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श के तहत ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिकी कर्ज की स्थिरता पर उठते सवालों ने निवेशकों को डरा दिया है. इसके साथ ही, अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण समुद्री आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, जिससे ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस तेल-प्रेरित मुद्रास्फीति (महंगाई) ने बॉन्ड यील्ड को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है. मार्च के अंत तक 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.32 प्रतिशत हो गई थी, जो हाल ही में 4.61 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है, यह इस साल का उच्चतम स्तर है.
डॉलर के विकल्प की तलाश में चीन
इस वैश्विक बदलाव के बीच, चीनी अधिकारी अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहे हैं. भू-राजनीतिक और वित्तीय जोखिमों से बचने के लिए पीपल्स बैंक ऑफ चाइना लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहा है. अप्रैल तक चीन का स्वर्ण भंडार लगातार 18 महीनों की बढ़त के साथ 74.64 मिलियन औंस तक पहुंच गया है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन किसी एक देश की मुद्रा या संपत्ति पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए यह विविधीकरण (Diversification) कर रहा है.
क्या डॉलर का दबदबा खत्म हो रहा है?
स्टैंडर्ड चार्टर्ड और मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि निवेशक अमेरिकी कर्ज से दूर हो रहे हैं, लेकिन अचानक बहुत बड़े पैमाने पर अमेरिकी संपत्तियों को डंप करना मुमकिन नहीं है. अमेरिकी डॉलर बाजार आज भी दुनिया का सबसे गहरा और सबसे लिक्विड (तरल) वित्तीय बाजार है. यूरो या येन जैसी अन्य वैश्विक मुद्राओं के सामने अपनी संरचनात्मक समस्याएं हैं, और वर्तमान में डॉलर का कोई मजबूत और स्पष्ट विकल्प मौजूद नहीं है. यही कारण है कि जोखिमों के बावजूद वैश्विक पूंजी के लिए अमेरिकी बाजार अभी भी एक स्वाभाविक गंतव्य बना हुआ है.