चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा: 'न्याय केवल प्रक्रिया नहीं, मानवीय संवेदना भी है'
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर में 1 मार्च, 2026 को मानव तस्करी विरोधी, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ई-साक्ष्य, ई-समन्स एवं 'न्याय श्रुति' पर केंद्रित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और न्यायिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. अकादमी के विवेकानंद ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं अकादमी के संरक्षक-इन-चीफ न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने किया.
इस गरिमामयी अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण पार्थ प्रतिम साहू, नरेश कुमार चंद्रवंशी, राकेश मोहन पांडेय, राधाकृष्ण अग्रवाल, संजय कुमार जायसवाल, रवींद्र कुमार अग्रवाल, अरविंद कुमार वर्मा, बिभु दत्त गुरु और अमितेंद्र किशोर प्रसाद भी उपस्थित रहे.
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने ज्ञान, संवेदनशीलता और संस्थागत समन्वय के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने पॉक्सो एक्ट की सफलता के लिए मानवीय और उद्देश्यपूर्ण व्याख्या को जरूरी बताते हुए न्यायिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अदालतों को ऐसा सुरक्षित स्थान बनाएं जहाँ पीड़ितों को सम्मान महसूस हो.
उन्होंने जांच अधिकारियों को वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने और पेशेवर निष्पक्षता बनाए रखने की हिदायत दी, साथ ही अभियोजकों को याद दिलाया कि उनका कर्तव्य सत्य की खोज में न्यायालय की सहायता करना है न कि केवल केस जीतना.
मुख्य न्यायाधीश ने न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ई-साक्ष्य और न्याय श्रुति जैसी डिजिटल तकनीकों को अपनाने और प्रगतिशील मानसिकता विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया.
इस तकनीकी सत्र में पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, महानिरीक्षक ध्रुव गुप्ता और जिला न्यायाधीश के.एल. चर्यानी ने विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन दिया, जबकि अकादमी के निदेशक और अतिरिक्त निदेशक द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया.