छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में हाथियों ने 76 बोरी धान तबाह किया
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. जिले के बंगुरसिया धान उपार्जन केंद्र में पिछले 10 दिनों के भीतर हाथियों ने 76 बोरियों धान को नुकसान पहुंचाया है. हैरानी की बात यह है कि वन विभाग के कर्मचारी और ग्रामीण चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं, फिर भी हाथी हर रात धावा बोल रहे हैं.
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पास के जंगल से तीन दंतैल हाथी रोज़ अंधेरा होते ही उपार्जन केंद्र की ओर बढ़ आते हैं. टॉर्च की रोशनी, शोर-शराबा और समूह में पहरा देने के बावजूद हाथी कभी चुपके से तो कभी आक्रामक होकर केंद्र में घुस जाते हैं. वे सूंड और दांतों से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर ले जाते हैं और वहीं खा जाते हैं.
हाल ही में एक रात मौके पर मौजूद लोगों ने देखा कि एक हाथी ने 1–2 बोरियां खा लीं, जबकि दो अन्य पास की झाड़ियों में छिपे रहे. भीड़ कम होते ही तीनों ने फिर से धावा बोला और तड़के करीब 3 बजे तक नुकसान पहुंचाते रहे.
वन विभाग के कर्मचारी विजय सिंह ठाकुर ने बताया कि यह तीनों हाथी कई दिनों से लगातार आ-जा रहे हैं और उन्हें खदेड़ने के प्रयासों के बावजूद सीमाएं लांघकर वापस लौट आते हैं.
वहीं, रायगढ़ के एसडीओ मनमोहन मिश्रा ने कहा कि उपार्जन केंद्र खुलने के बाद से लगातार निगरानी की जा रही है. कई बार हाथी शाम 7 बजे ही पहुंच जाते हैं और कुछ रातों में दो बार भी आते हैं. नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
बताया गया है कि जिले में करीब 40–45 हाथी मौजूद हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, लेकिन उपार्जन केंद्रों पर धावा मुख्य रूप से वयस्क नर हाथी ही बोल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के मौसम में धान की उपलब्धता और जंगलों के सिमटते आवास के कारण मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. (Symbolic Photo)