पुलिस ने बस्तर में माओवादी प्रचार के खिलाफ खोला नया मोर्चा
जगदलपुर । डेस्क: छत्तीसगढ़ पुलिस ने बस्तर क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत करते हुए एक नया मोर्चा खोला है, जिसे 'perception-war' का नाम दिया गया है. इसका उद्देश्य माओवादी प्रचार को बेनकाब करना और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति उनकी विरोधी मानसिकता को उजागर करना है.
हाल के महीनों में, माओवादियों ने बीजापुर और सुकमा जिलों में नौ शिक्षकों (शिक्षा दूतों) की हत्या कर दी, जिन्हें वे पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाते हैं. इनमें से हालिया शिकार बीजापुर के गंगलूर में कल्लू ताती और सुकमा के सिलगेर गांव में लक्ष्मण बरसे थे, जिन्हें तीन दिनों के भीतर मार दिया गया.
पुलिस का कहना है कि ये हमले माओवादियों की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत वे दूरदराज के गांवों में स्कूलों को दोबारा खोलने से रोकना चाहते हैं, क्योंकि वे इसे अपने नियंत्रण के लिए खतरे के रूप में देखते हैं.
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने जोर देकर कहा कि शिक्षा चरमपंथी विचारधारा के लिए सबसे बड़ा खतरा है.
उन्होंने कहा, "जहां शिक्षा रुकती है, वहां विकास भी ठप हो जाता है. माओवादी इस अंधेरे को बनाए रखना चाहते हैं, क्योंकि उनका सबसे बड़ा डर यह है कि शिक्षित बच्चे हिंसा के रास्ते को ठुकरा देंगे." उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे खतरों के बावजूद अपने बच्चों को स्कूल भेजें.
पुलिस ने इस प्रचार का जवाब देने के लिए सोशल मीडिया पर सामग्री जारी की है, जिसमें मीम्स शामिल हैं, जो माओवादियों का "असली चेहरा" दर्शाते हैं. एक ग्राफिक में कहा गया है कि माओवादियों के लिए "सबसे बड़ा दुश्मन बंदूक नहीं, बल्कि किताब है," जो इस बात पर जोर देता है कि शिक्षित आदिवासी युवा उनके प्रभाव को कमजोर कर सकते हैं.
हाल के सुरक्षा अभियानों में कई वरिष्ठ माओवादी नेताओं को मार गिराया गया और हथियारों व विस्फोटकों की बरामदगी हुई है. अधिकारियों का मानना है कि इन असफलताओं के कारण माओवादी अब नागरिकों पर हमले कर रहे हैं ताकि भय पैदा करके अपनी खोई हुई साख को फिर से स्थापित कर सकें.
बस्तर में, जहां संघर्ष केवल जंगलों के नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि कक्षाओं के भविष्य को लेकर भी है, राज्य की यह नई पहल अगली पीढ़ी को चरमपंथ से दूर और अवसरों की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर ध्यान देकर, पुलिस न केवल हिंसा का जवाब दे रही है, बल्कि विचारों के स्तर पर भी माओवादियों को चुनौती दे रही है.